केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वो प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवाने की बजाय एनसीईआरटी की किताबों से ही छात्रों की पढ़ाई करवाएं। लेकिन बाजार में कक्षा 6 से12 वीं तक की एनसीआरटी की किताबों की कमी है। ऐसे में दुकानदार भी बच्चों को प्राइवेट पब्लिशर्स की किताब खरीदने की सलाह दे रहे हैं, जिससे छात्रों को अधिक कीमत भी चुकानी पड़ रही है।
छात्रों का कहना है कि एनसीईआरटी की किताब 100 रुपये के अंदर मिल जाती है। वहीं प्राइवेट पब्लिशर्स की किताब के लिए 600 से 700 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स मजबूरी में सीबीएसई की वेबसाइट पर जाकर नोट डाउनलोड कर रहे हैं या फिर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताब खरीद रहे हैं। 6 से 8 वीं कक्षा तक के बच्चों के लिए और भी दिक्कत हो रही हैं। वे इंटरनेट से डाउनलोड नहीं कर पाते। ऐसे में उनके अभिभावक परेशान हो रहे हैं। मजबूरी में साइबर कैफे में जाकर मदद ले रहे हैं।
करानी पड़ रही है एडवांस बुकिंग
अट्टा मार्केट में 12 वीं की किताब खरीदने आई शिखा शर्मा ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबों की बहुत कमी चल रही है। वह इतिहास की किताब खरीदने आई थी लेकिन उन्हें कहीं पर भी नहीं मिलीं। अब दुकानदार ने पैसे लेकर किताब के लिए एडवांस बुकिंग की है। शिखा ने बताया कि मेरी कक्षा के 80 फीसदी छात्रों को इतिहास की किताब नहीं मिली है।
एनसीईआरटी की पुरानी किताबों की भी कमी
अट्टा मार्केेट के दुकानदार मनोज ने बताया कि नई किताबें तो आ ही नहीं रही है। तकरीबन हर कक्षा की किताबों की कमी चल रही है। 11 और 12 वीं कक्षा का एक भी भी सेट नहीं है। सेकेंड हैंड किताबाें के रेट 40 फीसदी कम होते हैं। इसलिए लोग ज्यादा खरीदते हैं। पुरानी किताबों के लिए भी दिल्ली जाना पड़ रहा है।