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बीबीएयू में होगी उर्दू, संस्कृत व योग की पढ़ाई

Wed, 06 Apr 2016 04:39 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ

सार

  • मास्टर्स इन वीमेन स्टडीज पर भी एकेडमिक काउंसिल ने लगाई मोहर
  • अब 20 अप्रैल तक कर सकेंगे आगामी सत्र के आवेदन
  • तीनों डिप्लोमा कोर्स एक एक साल के 
  • पीजी कोर्स में 60 सीटों पर प्रवेश की संभावना 
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जल्द शुरू होंगे कुछ नए कोर्स - फोटो : Demo pic
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विस्तार
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बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में आगामी सत्र से मास्टर्स इन वीमेन स्टडीज का कोर्स शुरू करने के लिए एकेडमिक काउंसिल ने मंजूरी दे दी है। 
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विश्वविद्यालय में मंगलवार को हुई बैठक में कोर्स की मंजूरी के बाद कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने जल्द से जल्द इनका सिलेबस तैयार करके प्रवेश प्रक्रिया करने को कहा।

इसके अलावा एकेडमिक काउंसिल ने उर्दू, संस्कृत व योगा का डिप्लोमा कोर्स शुरू करने के लिए भी स्वीकृति दी है। यह तीनों डिप्लोमा कोर्स एक-एक साल के होंगे। 
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वहीं, विवि ने आगामी सत्र में प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को 10 अप्रैल से बढ़ाकर 20 अप्रैल कर दिया है। पीजी कोर्स में 60 सीटों पर प्रवेश की संभावना है। हालांकि, इनके सिलेबस और सीट निर्धारण के लिए सीट गठन कर दिया गया है।

विवि के प्रवक्ता प्रो. कमल जायसवाल ने कहा कि इस संस्कृत देश की संस्कृति से जुड़ी भाषा है। इस देश की संस्कृति का विश्व में सम्मान किया जाता है। इसीलिए जरूरी है कि युवा वर्ग को इससे जोड़ा जाए।

इसके अलावा उर्दू भाषा भी नवाबों के इस शहर की शान होने के साथ ही इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। उन्होंने कहा कि इस साल दोनों भाषाओं में डिप्लोमा कोर्स से शुरुआत की जाएगी। बाद में इनके पीजी कोर्स भी शुरु होंगे।
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महिला सशक्तिकरण को दिया जाएगा बढ़ावा

मास्टर्स इन वीमेन स्टडीज कोर्स - फोटो : demo pic
प्रो. कमल ने बताया कि योग के प्रति न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व में जागरूकता आई है। स्वास्थ्य के लिए बेहतर होने के कारण ही 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाने लगा है।

ऐसा होने से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। यह कोर्स करने से एक तरफ जहां स्टूडेंट्स को स्वास्थ्य लाभ होगा वहीं रोजगार की राह भी खुलेगी।

आज देश भर में महिला सशक्तिकरण को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। पिछले कुछ सालों में महिलाओं ने सभी क्षेत्रों में अपना परचम लहराया है। बात चाहे फिर शिक्षा के क्षेत्र की हो या बैंकिंग, आईटी, सेना व पुलिस, आदि क्षेत्रों में काम करने की।

प्रो. कमल जायसवाल ने बताया कि इस तरह के कोर्सेज को सभी शिक्षण संस्थानों में बढ़ावा देने की जरूरत है। अभी तो इसमें पीजी का कोर्स शुरू हो रहा है

इसके बाद शोध को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दे व समस्याएं सामने आएंगी जिनके समाधान ढूंढे जा सकते हैं। इस क्षेत्र में शोध करके महिलाओं की स्थिति को बेहतर किया जा सकता है।
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