स्किल इंडिया के लिए देश में नए एजुकेशन सिस्टम की जरूरत है। ऐसा सिस्टम जो बुनियादी जरूरतों को समझते हुए शिक्षा के सहारे हमारी स्किल के माध्यम से रोजगार के अवसर प्रदान कर सके। यह बात हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने विश्वविद्यालय में दीनदयाल उपाध्याय कौशल केन्द्र की तरफ से उच्च शिक्षा में कौशल विकास विषय आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही।
अग्निहोत्री ने बताया कि हमारे देश का गुरुकुल सिस्टम हमेशा से बेहतर रहा है। यहां ज्ञान के साथ कौशल को निखारने का भी अवसर दिया जाता था। संगोष्ठी में बतौर विशिष्ट अतिथि आए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतीहारी, बिहार के वाइस चांसलर प्रो. अरविंद अग्रवाल ने कहा कि कौशल कार्यों को सही मंच मिलना भी बेहद अहम है।
कौशल विकास में दक्ष लोगों के कौशल का मूल्य बाजार के मुताबिक नहीं होगा तो उसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा। हमारे यहां स्किल एक्सपर्ट लोगों की बेहद कमी है। हमें जरूरत है कि अकादमिक स्तर पर ऐसा माहौल बनाया जाए जो लोगों के कौशल को बढ़ावा दे सके। समापन सत्र के मुख्य वक्ता हरजीत सिंह ग्रेवा अध्यक्ष पंजाब एवं खादी ग्रामोद्योग बोर्ड ने बताया कि देश में वर्क कल्चर खत्म होता जा रहा है।
कौशल विकास को लेकर स्कूल स्तर से ध्यान देना होगा ताकि युवाओं में वर्क कल्चर बन सके। वहीं विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह वर्मा ने कहा कि कौशल विकास के लिए हमें जमीनी स्तर पर बदलाव की आवश्यकता है। नई पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी के कौशल के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है।
हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा जो मोबाइल और ई. लर्निंग के जमाने में हमारे पारंपरिक कौशल को बनाए रख सके। संगोष्ठी में देश भर के 11 राज्यों से 100 से अधिक अकादमिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी में डॉ. मनोज सक्सेना, डॉ. हर्ष मिश्रा, डॉ. राम प्रवेश राय, डॉ. भगवान सिंह भी मौजूद रहे।