अगर आप ग्रेजुएशन या 12वीं के बाद शिक्षक बनना चाहते हैं तो इसके लिए योगा भी अनिवार्य होगा। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन(एनसीटीई) ने नियमावली 2014 के तहत योगा को सिलेबस का हिस्सा बनाने के बाद अब इसका पूरा सिलेबस जारी कर दिया है। डीएलएड, बीएड और एमएड में योगा की पढ़ाई के बिना डिग्री नहीं मिलेगी।
एनसीटीई के सदस्य सचिव जुगलाल सिंह की ओर से सभी बीएड, एमएड, डीएलएड कॉलेजों के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें सभी कोर्सेज में अलग-अलग योगा का सिलेबस जारी किया गया है।
कॉलेजों को अपनी लाइब्रेरी में यह पुस्तक रखनी होगी और छात्रों के लिए अलग से सस्ते दामों पर पुस्तक खरीदने का मौका दिया गया है। डीएलएड में योग और योगाभ्यास का परिचय, योग ग्रंथों का परिचय, योग और स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा के लिए अनुप्रयुक्त योग, योग और संज्ञानात्मक भावात्मक विकास, योग और शारीरिक विकास और योगा प्रैक्टिकल शामिल है।
शिक्षकों के जरूरी होगा योग का ज्ञान
योगा
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बीएड के लिए योग और यौगिक क्रियाओं का परिचय, योग ग्रंथों का परिचय, योग और स्वास्थ्य और प्रैक्टिकल होगा। एमएड के लिए योग एवं व्यक्तित्व विकास, योग एवं तनाव प्रबंधन, योग व आत्म विकास और प्रैक्टिकल होगा। मकसद यह है कि कोर्स करने के बाद जो भी शिक्षक पढ़ाने के लिए जाएं, वह बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकें।
इनका है कहना
एनसीटीई के नए रेगुलेशन के मुताबिक योगा कोर्स भी अनिवार्य कर दिया गया है। अब किसी भी छात्र को इन कोर्सेज को पूरा करने के लिए सिलेबस के तहत इसकी परीक्षा पास करनी होगी।
-सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट