प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की प्रगति में आधी आबादी के योगदान को अहम मानते हुए लड़कियों की शिक्षा में विशेष जोर दे रहे हैं।
उनका नारा है ‘पढ़ेंगी बेटियां तो आगे बढ़ेंगी बेटियां’। लेकिन, राज्य में जिम्मेदारों का प्रधानमंत्री की मंशा से कोई सरोकार नजर नहीं आता। कम से कम आश्रम पद्धति में संचालित राजकीय बालिका विद्यालय, लाखामंडल की दुर्दशा देखकर तो कोई भी यही कहेगा।
करीब 185 छात्राओं के विद्यालय में आठ कमरे हैं, जिनमें से छह का इस्तेमाल छात्रावास के रूप में होता है। बाकी दो में कक्षाएं संचालित होती हैं। एक कमरे में छह से आठ तक की कक्षाएं चलती हैं और दूसरे में नौ व दस की।
अब सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्राएं किस प्रकार से पढ़ाई कर रही होंगी। इतना ही नहीं विद्यालय में पिछले दो वर्षों से स्कूल में प्रधानाचार्य समेत कला, संस्कृत, व्यायाम, कंप्यूटर, भूगोल के शिक्षकों के छह पद खाली हैं, लेकिन विभाग इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
छात्रावास भी बदहाल
विद्यालय का छात्रावास भी पूरी तरह बदहाल है। एक-एक कमरे में दर्जनों छात्राएं एक साथ रहने को मजबूर हैं। छात्रावास के स्नानागार में दरवाजे तक नहीं है। ऐसे में छात्राएं पर्दा लगाकर स्नान करती हैं। पानी और बिजली कनेक्शन न होने से शौचालय बंद पड़ा है।
जिस कारण छात्राओं को शौच के लिए एक किमी. दूर जंगल में जाना पड़ता है। छात्राएं लकड़ी के जिन तख्तों पर बैठकर पढ़ती हैं, उन्हीं पर बैठकर भोजन करती हैं और उन्हीं पर सो जाती हैं। छात्रावास में बैठने के लिए कुर्सियों तक की व्यवस्था नहीं है। फर्नीचर के अभाव में छात्राएं जो टाट पट्टी का इस्तेमाल करती हैं, वह भी वर्षों पुरानी हैं और फट चुकी हैं।