विवादों से घिरे गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे एमबीबीएस छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। अंतिम वर्ष के छात्रों की एक महीने से इंटर्नशिप रुकी हुई है। छात्रों को चिंता है कि यदि किसी कारण मेडिकल काउंसलिंग ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी तो उनके मेडिकल पंजीकरण पर भी असर पड़ सकता है।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति से मिलने गए एमबीबीएस छात्रों को जब ठोस आश्वासन नहीं मिला और वे मायूस होकर लौट आए।
दरसअल, मेडिकल काउसिंल ऑफ इंडिया(एमसीआई) के नियमानुसार एमबीबीएस के चार वर्षीय कोर्स के बाद एक साल की इंटर्नशिप करना अनिवार्य है। इंटर्नशिप खत्म होने के बाद छात्र का नाम स्टेट मेडिकल काउसिंल में पंजीकृत होता है।
इसके बाद ही वह डॉक्टरी या पीजी कोर्स (एमडी, एमएस) कर सकता है। लेकिन गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज में 2011 में दाखिल पहले बैच के छात्र अपने भविष्य को बचाने के लिए कुलपति कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
2011 बैच में विश्वविद्यालय टॉपर रही अंशिका, चेतना सहित अन्य छात्र भी शामिल हैं। जिन्हें भविष्य अधर में दिखाई दे रहा है। छात्र दीपक, अंकित, तुषार, मोहित ने बताया कि दिसंबर में परीक्षा देने के बाद 82 छात्रों की एक जनवरी से इंटर्नशिप शुरू हो गई थी। लेकिन अब कॉलेज के हालात सहीं नहीं होने के कारण इंटर्नशिप बंद हो गई है यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला तो उनका भविष्य चौपट हो जाएगा।
तैनात हुई पुलिस
सोमवार रात गर्ल्स हॉस्टल में घुसे तीन लोगों की घटना से अब पुलिस सक्रिय हो गई। मंगलवार को छायंसा पुलिस के दो सिपाही पूरी रात मेडिकल कॉलेज के बाहर तैनात रहे। इस बारे में छात्राओं ने छांयसा थाना पुलिस को लिखित शिकायत की थी। घटना से एमबीबीएस छात्रा दहशत में थी।