खंड तावड़ू में बने मेवात मॉडल स्कूल में बस परिवहन सुविधा के अभाव में समीप के गांव के लोगों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।
खण्ड के गांव भाजलाका, चीला, पचगांव, गवारका, छारौड़ा, चिलावली, सिलखो, मसीत, ढिलमकी, बुराका , बावला, कांगरका,भडंगपुर, सेवका, रानियाकी, गुनावट, भोगीपुर, मंदारका, नानुका, एवं नाई नंगला के सैकडों बच्चों को स्कूल में बस सुविधा के अभाव में दाखिले का फायदा नहीं मिल पा रहा है।
एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं के नारे को सार्थक करने के लिए रात दिन एक कर रही है। वहीं दूसरी और हरियाणा सरकार सूबे के सबसे पिछडे जिले मेवात के तावडू खंड के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
खण्ड के लगभग बीस से भी ज्यादा गांव की एक भी लडकी एवं लडके का मेवात मॉडल स्कूल तावडू में कोई भी दाखिला नहीं है। जिससे तावडू खण्ड के मेव समुदाय के लोगों में काफी रोष है।
इलाके के सेवानिवृत वरिष्ट वैज्ञानिक एवं समाजसेवी डाक्टर सुभान खान ने भी इस तरह के भेदभाव की कडे़ शब्दों में निंदा की है। वैसे तो तावडू खण्ड पिछडे मेवात के बाकी खण्डों से काफी सम्पन्न इलाका समझा जाता है।
लेकिन इलाके के मेव समुदाय के लोगों के हालत यहां भी काफी दयनीय है। पिछडेपन की झलक इलाके के लोगों के रहने सहने व शैक्षणिक पिछडेपन को देखकर आसानी से लगाई जा सकती है।
हालत इतने खराब है कि इक्कसवी सदी में तावडू खण्ड के गांव में ना तो अभिभावक ही शिक्षा के प्रति जागरूक है ओर न ही प्रशासन का कोई विशेष ध्यान है जिसकी सीधी मार मेवात के भविष्य समझे जाने वाले मेवात के बच्चों पर पड रही है और उनका भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है।
इलाके के समाजसेवी हाजी युनुस बेरी, अली प्रधान मण्डारका , शहीद सिलखो, इरफान गंवारका, शेर मौहमद, छारोडा, सत्तार छारोडा, एवं जमालु पंच आदि ने सरकार व जिला प्रशासन से मांग की है कि तावडू खण्ड के सभी गांव में विशेष दाखिला अभियान चलाकर इलाके के बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर दाखिला दिया जाऍ, जिसमें इलाके की बेटियों एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के बच्चों को प्रवेश परीक्षा में विशष छूट देकर दाखिला किया जाए।