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8वीं तक की परीक्षाओं में बदलाव, अब ऐसे निकलेगा रिजल्ट

Sat, 23 Apr 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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अब टेस्ट और परीक्षाओं के आधार पर ए से लेकर ई तक ग्रेडिंग तय की जाएगी।
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हिमाचल में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों के अब साल में चार यूनिट टेस्ट और दो परीक्षाएं ली जाएंगी। शिक्षा विभाग ने छात्रों के मूल्यांकन का तरीका बदल दिया है। राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने वीरवार को बदलाव की अधिसूचना जारी करते ही नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।
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अब टेस्ट और परीक्षाओं के आधार पर ए से लेकर ई तक ग्रेडिंग तय की जाएगी। अभी तक आठवीं कक्षा तक टेस्ट लेने की कोई भी अनिवार्यता नहीं थी। कई स्कूलों में शिक्षक मर्जी से छात्रों का मूल्यांकन कर उन्हें अगली कक्षा में भेज देते थे।

अब केंद्र सरकार के आदेशानुसार हिमाचल सरकार ने मूल्यांकन की व्यवस्था में बदलाव करते हुए परीक्षाएं लेना जरूरी कर दिया है। उत्तर पुस्तिकाओं का भी रिकार्ड रखा जाएगा। ग्रेडिंग भी दी जाएगी। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नई व्यवस्था को लागू किया गया है।
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राज्य सरकार ने पहली से आठवीं कक्षा तक छात्रों का मूल्यांकन करने के लिए शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन छुट्टियों वाले स्कूलों के लिए अलग-अलग से यूनिट टेस्ट और परीक्षाओं का शेड्यूल भी तय किया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान ने इसकी पुष्टि की है।

परीक्षाओं का यह रहेगा शेड्यूल

दो टर्म में दो-दो टेस्ट और एक-एक परीक्षा ली जाएगी।
शीतकालीन छुट्टियों वाले स्कूलों में मार्च महीने के अंतिम सप्ताह, मई महीने के दूसरे सप्ताह, अगस्त के तीसरे सप्ताह, और अक्तूबर के तीसरे सप्ताह में पहले दो पीरियडों (60 से 75 मिनट) में यूनिट टेस्ट होंगे। इसके बाद अन्य पीरियड नियमित तौर पर लगेंगे।

जून के अंतिम सप्ताह और दिसंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली परीक्षाएं तीन घंटे की होंगी। ग्रीष्मकालीन छुट्टियों वाले स्कूलों में मई के दूसरे सप्ताह, जून के तीसरे सप्ताह, नवंबर के तीसरे सप्ताह और जनवरी के पहले सप्ताह में पहले दो पीरियडों में यूनिट टेस्ट होंगे। सितंबर के तीसरे सप्ताह और मार्च के दूसरे सप्ताह में परीक्षाएं तीन घंटे की होंगी। दो टर्म में दो-दो टेस्ट और एक-एक परीक्षा ली जाएगी।

ग्रेड से होगा छात्रों का मूल्यांकन

परीक्षाओं के आधार पर छात्रों को ग्रेड दिए जाएंगे।
परीक्षाओं के आधार पर छात्रों को ग्रेड दिए जाएंगे। 80 से 100 के बीच नंबर प्राप्त करने वालों को ए ग्रेड। 65 से 79 तक बी ग्रेड, 50 से 64 तक सी ग्रेड, 35 से 49 तक डी ग्रेड और 1 से 34 के बीच अंक प्राप्त करने वाले बच्चों को ई ग्रेड दिया जाएगा।

खामियां पता लगाने को लगेंगे परफार्मेंस रजिस्ट्रर
स्कूली बच्चों की खामियों का पता लगाने के लिए हर स्कूल में परफार्मेंस रजिस्ट्रर लगाए जाएंगे। शिक्षकों को इस रजिस्ट्रर में हर बच्चे की जानकारी का ब्योरा लिखना होगा। परीक्षाओं में किस विषय में कितने अंक आए?

किन कारणों के चलते बच्चे ने अच्छा परिणाम नहीं दिया? इन खामियों को दूर करने के लिए शिक्षक क्या कर रहे हैं? इसका ब्योरा रजिस्ट्रर में दर्ज होगा। स्कूलों में किए गए बदलाव को जांचने के लिए विशेष जांच दल भी गठित किए जाएंगे। दल औचक निरीक्षण करेंगे।
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सूबे में आठवीं क्लास तक फेल नहीं होते बच्चे

राइट टू एजूकेशन एक्ट के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक स्कूली बच्चों को फेल नहीं किया जाता है। - फोटो : demo pic
राइट टू एजूकेशन एक्ट के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक स्कूली बच्चों को फेल नहीं किया जाता है। पढ़ाई में कमजोर बच्चों को भी अगली कक्षा में दाखिल कर दिया जाता है। इस व्यवस्था के चलते नवमी कक्षा में फेल होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ जाती है।

आठवीं कक्षा तक पास और फेल की व्यवस्था न होने से उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कई छात्र पिछड़ भी जाते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए अब साल में छह बार परीक्षाएं लेने का फैसला लिया गया है।

ऐसे होगी असेसमेंट
- कक्षा पहली और दूसरी : 25 नंबर के यूनिट टेस्ट होंगे। 10 नंबर ओरल और 15 नंबर रिटन के होंगे। परीक्षा 50 नंबर की होगी। इसमें 10 नंबर असाइनमेंट, 15 नंबर ओरल और 25 नंबर रिटन के होंगे। कुल 100 नंबरों से बच्चों का मूल्यांकन होगा।- कक्षा तीसरी से आठवीं : 25 नंबर के यूनिट टेस्ट में पांच नंबर ओरल और 20 नंबर रिटन के होंगे। 50 नंबर की परीक्षा में 15 नंबर की असाइनमेंट और 35 नंबर का रिटन होगा।
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