हिमाचल प्रदेश कंबाइंड एंट्रेंस एग्जाम (एचपीसीईटी) को अब ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) के बराबर तवज्जो मिलेगी। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एचपीसीईटी और जेईई की मेरिट पर बराबर सीटें भरी जाएंगी। इससे पहले इंजीनियरिंग कॉलेजों में नेशनल लेवल के एग्जाम जेईई की मेरिट के आधार पर ही सीटें भरी जाती रही हैं।
बीते वर्ष सरकार ने सूबे में हिमाचल प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी हमीरपुर के माध्यम से एचपीसीईटी की प्रवेश परीक्षा करवाने का निर्णय लिया था। एचपीसीईटी के बावजूद बीते वर्ष प्रदेश के कॉलेजों में जेईई के आधार पर सीटें भरी गईं।
जेईई में कम अंक लेने के बावजूद इस नेशनल लेवल की परीक्षा देने वालों को प्रदेश के मनचाहे सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन मिल गई। जेईई की मेरिट खत्म होने के बाद ही एचपीसीईटी से सीटें भरी गई थीं।
एचपीसीईटी में अच्छे अंक लेने वाले अधिकतर छात्रों को सरकारी कालेजों में एडमिशन नहीं मिली। विद्यार्थियों का कहना था कि अगर सूबे में जेईई से ही सीटें भरी जानी थीं तो एचपीसीईटी क्यों करवाया गया। विद्यार्थियों की इस प्रतिक्रिया को सही मानते हुए अब
हिमाचल प्रदेश तकनीकी विवि हमीरपुर ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए एचपीसीईटी और जेईई को बराबर अधिमान देने के लिए 50:50 फीसदी के अनुपात में सीटें भरने का निर्णय लिया है। सूबे में वर्तमान में 18 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इनमें करीब 7000 विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं।
वर्तमान में प्रदेश में 18 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। चार इंजीनियरिंग कॉलेज सरकारी, 14 निजी क्षेत्र में चल रहे हैं। इनमें सिविल इंजीनियरिंग, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक्स एंड कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक्स, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग और ऑटोमाबाइल में इंजीनियरिंग होती है।
हिमाचल प्रदेश तकनीकी विवि हमीरपुर ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए एचपीसीईटी और जेईई को बराबर अधिमान देने के लिए 50:50 फीसदी के अनुपात में सीटें भरने का निर्णय लिया है। -प्रो. वीपी पटियाल, परीक्षा नियंत्रक, हिप्र तकनीकी विवि हमीरपुर