पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्यपाल को भेजे पत्र में अतिथि शिक्षकों की समस्या का समाधान करने की मांग की है। हरीश रावत ने प्रतिनिधिमंडल को भी आश्वस्त किया कि यदि एक दो दिन में समस्या का निस्तारण नहीं हुआ तो वह धरने पर बैठेंगे।
रावत ने राज्यपाल को भेजे पत्र में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त दो सलाहकार चाहे उन्हें मंत्री के अधिकार दिए गए हो, लेकिन वह निर्वाचित सरकार के फैसलों को बदल नहीं सकते है और न ही निर्वाचित सरकार के कैबिनेट मंत्री का स्थान ले सकते हैं। इसलिए शासन गलत कदम ना उठाए।
पूर्व सीएम से मिले अतिथि शिक्षक
अतिथि शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को बीजापुर अतिथि गृह में पूर्व सीएम हरीश रावत से मिला। हरीश रावत ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मामले में वह महामहिम राज्यपाल को पत्र लिखकर समस्या का समाधान करने की मांग कर रहे है। इससे पहले एक पत्र भेजा जा चुका है।
उन्होंने अतिथि शिक्षकों को आश्वस्त किया कि एक दो दिन में अतिथि शिक्षकों की समस्या का समाधान नहीं निकलता है तो वह उनके साथ परेड ग्राउंड में सांकेतिक धरने पर बैठेंगे।
पत्र में रावत ने अवगत कराया है कि राज्य में पिछले कई वर्षों से दूरस्थ गांवों में स्कूलों व कॉलेजों में अध्यापक नहीं थे, इसलिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियां की गई। शिक्षा में निरंतर आ रही गिरावट को समाप्त करने के लिए अधिकारियों और मंत्रिमंडल में व्यापक विचार विमर्श हुआ। अंतत: यह निर्णय लिया गया कि शिक्षक विहीनता की स्थिति तभी समाप्त हो सकती है, जब ब्लॉक स्तर पर मेरिट बनाकर शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।