डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के स्टूडेंट्स उद्योग की जरूरतों के हिसाब से तैयार होंगे। इंडस्ट्री व एकेडमिक्स के बीच गैप को भरने के लिए लखनऊ में इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग (आईईटी) के साथ ही जेएसएस नोएडा और एबीएसआईटी, गाजियाबाद में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी।
एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने गुरुवार को एंट्यूपल संस्थान के निदेशक एसडी मेहता के साथ इस संबंध में एमओयू साइन किया। तीनों सेंटर पर इंडस्ट्री के विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे। ये संस्थानों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। जिससे कि वे अपने यहां के स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से तैयार कर सकें।
कुलपति प्रो. विनय पाठक ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य इंडस्ट्री व एकेडमिक्स के बीच मौजूद गैप को भरना है। मौजूदा समय में स्टूडेंट्स को जो क्लास में पढ़ाया जाता है, इंडस्ट्री में वह नहीं मिलता। ऐसे में डिग्री लेने के बाद नौकरी मिलने में समस्या होती है। स्टूडेंट्स को कॉलेज परिसर में इंडस्ट्री जैसा माहौल मिल सके, इसलिए संस्थानों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जा रही है।’
एंट्यूपल के निदेशक मेहता ने कहा कि इंडस्ट्री में आने के बाद ट्रेनिंग देना काफी कठिन काम होता है। इसलिए वे खुद शैक्षणिक संस्थानों में जाकर अपनी जरूरतों के हिसाब से स्टूडेंट्स तैयार करते हैं।
इसी के तहत एकेटीयू के साथ मिलकर तीन सेंटर स्थापित कर रहे हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विश्वविद्यालय देगा जबकि एंट्यूपल की ओर से हर सेंटर पर दो-दो विशेषज्ञ तैनात रहेंगे।
शिक्षकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
स्टूडेंट्स को मिलेगा फायदा
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विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के लिए सेंटर पर फैकल्टी डवलपमेंट कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसमें संस्थानों के शिक्षकों को सात-सात दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका मकसद शिक्षकों को इंडस्ट्री की जरूरतों के बारे में बताना है। शिक्षक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री के बारे में बता सकेंगे।
साथ ही वे विश्वविद्यालय की बोर्ड स्टडीज में सिलेबस को अपडेट करने में अपने सुझाव देने में भी सक्षम हो सकेंगे। पढ़ाई पूरी करने के बाद स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री की जरूरतों की जानकारी होने का फायदा मिलेगा।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर स्टूडेंट्स के लिए प्रोजेक्ट पर आधारित प्रतियोगिता होंगी। प्रतियोगिता हर छह महीने पर होगी। इसमें स्टूडेंट्स को अपने-अपने प्रोजेक्ट्स व आइडियाज देने होंगे। प्रतियोगिता जीतने वाले स्टूडेंट्स को आगे की रिसर्च के लिए धन व उपकरण दोनों मुहैया कराया जाएगा। इससे स्टूडेंट्स में इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।
इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें खाली रहने का सबसे बड़ा कारण पढ़ाई के बाद प्लेसमेंट न होना है। असल में स्टूडेंट्स जो कुछ क्लास में पढ़ते हैं, इंडस्ट्री के हिसाब से वह पुराना हो चुका है। इसलिए विवि ने एंट्यूपल के सहयोग से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के लिए एमओयू साइन किया है। इससे स्टूडेंट्स और शिक्षक दोनों को इंडस्ट्री की जानकारी मिल सकेगी।
- प्रो. विनय पाठक, कुलपति एकेटीयू