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बोलियों को सम्मान, जल्द खुलेगी गढ़वाली-कुमाऊंनी एकेडमी

Fri, 15 Apr 2016 09:32 AM IST
बिशन सिंह बोरा/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • शासन स्तर से कवायद तेज, अपनी बोली को मिलेगा सम्मान 
  • गढ़राजाओं व चंद्र शासनकाल में राजभाषा रही दोनों बोलियां
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क्लास - फोटो : demopic
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विस्तार
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प्रदेश में गढ़वाली और कुमाऊंनी एकेडमी जल्द स्थापित की जाएगी, इसके लिए शासन स्तर पर कवायद शुरू की जा रही है। इससे अपनी बोली को जहां सम्मान मिलेगा, वहीं दोनों बोलियों को भाषा का दर्ज दिलाने के लिए नेताओं पर दबाव भी बढ़ेगा।
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मालूम हो कि गढ़राजाओं और चंद शासनकाल में दोनों ही बोलियों को राजभाषा का दर्जा हासिल था। पिछले दिनों शासन ने गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और रं को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करके सकारात्मक पहल की है।
  
मैथिली, बोडो और कोकणी से कही अधिक लोग गढ़वाली, कुमाऊंनी बोलते हैं। 1560-1790 ईसवी तक सभी शासकीय कार्य गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा में होते थे। तामपत्रों, शिलालेखों एवं सरकारी दस्तावेजों में इसके अभिलेखीय प्रमाण मौजूद हैं।
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सन 1905 में गढ़वाल यूनियन नामक संस्थान से तारादत्त गैरोला और विश्वंभर दत्त चंदोला ने गढ़वाली पत्रिका का संपादन शुरू किया।
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गढ़वाली, कुमाऊंनी में लिखे जा चुके हैं ग्रंथ

स्टूडेंट - फोटो : demo
गढ़वाल सभा के सुयश कुकरेती के मुताबिक देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में गढ़वाली, कुमाऊंनी भाषा एवं साहित्य पर कई शोध ग्रंथ लिखे जा चुके हैं। सन 1913 में गढ़वाली भाषा का प्रथम समाचार पत्र गढ़वाली प्रकाशित हुआ। इसके अलावा भी इसकी कई साहित्यिक पृष्ठभूमियां हैं, इसके बावजूद गढ़वाली, कुमाऊंनी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जा सका है।

बोली भाषा को मिलेगा प्रोत्साहन
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने शासन को गढ़वाली व कुमाऊंनी एकेडमी की स्थापना के निर्देश दिए थे। अपर सचिव बीआर टम्टा ने कहा कि गढ़वाली, कुमाऊंनी एकेडमी की स्थापना के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। यह नियमावली में भी है, इससे स्थानीय बोली भाषा को प्रोत्साहन मिलेगा। 

राजभाषा के दर्जे को भी कवायद
दून निवासी मयंक, सुयश कुकरेती व संदीप भट्ट की ओर से आरटीआई के तहत शासन से मांगी सूचना में अपर सचिव बीआर टम्टा ने कहा कि हिंदी उत्तराखंड की राजभाषा एवं संस्कृति द्वितीय राजभाषा है। गढ़वाली और कुमाऊंनी को भी राज भाषा का दर्जा दिलाने के लिए कोशिश की जा रही है। 
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