विदेश में पढ़ाई की राह अब और मुश्किल हो गई है। स्कॉलरशिप एप्टीट्यूड टेस्ट(सैट), टेस्ट ऑफ इंगलिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज(टॉफेल), ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट(जीमैट) के पैटर्न में पिछले साल के मुकाबले कई बड़े परिवर्तन कर दिए गए हैं।
इससे हर साल दून सहित देशभर से इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों को बड़ा झटका लगा है। राजधानी से हर साल 800 से ज्यादा युवा इन परीक्षाओं में बैठते हैं। सैट में 12वीं के बाद छात्र शामिल होते हैं जबकि जीमैट में ग्रेजुएशन वाले छात्रों को मौका मिलता है।
टॉफेल, एक लैंग्वेज टेस्ट होता है, जिसमें हर विदेश जाने वाले छात्र को शामिल होना जरूरी है। देशभर से हर साल करीब तीन लाख छात्र इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
विदेश शिक्षा के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। हर साल दून से ही 800 से ज्यादा युवा इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। इस साल सैट में 30 वर्षों के बाद बदलाव हुआ है। लगन के साथ पैटर्न के हिसाब से तैयारी की जाएगी तो निश्चित तौर पर आसानी होगी।
- पंकज तलवार, जीएम, जंबूरी एजुकेशन
ये हुए बदलाव
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सैट : तीन घंटे की होगी परीक्षा
सैट के स्कोर से यूएसए के विभिन्न संस्थानों में दाखिला दिया जाता है। पिछले 30 सालों में यह सैट में सबसे बड़ा बदलाव किया गया है। अब तीन घंटे 45 मिनट के बजाय केवल तीन घंटे का समय मिलेगा। हालांकि निगेटिव मार्किंग नहीं है। पहले पांच वैकल्पिक उत्तर आते थे, अब इनकी संख्या चार कर दी गई है। कंपोनेंट्स को रिवाइज कर क्रिटिकल रीडिंग को एविडेंस बेस्ड रीडिंग, राइटिंग सेक्शन में रीडिंग, राइटिंग और लैंग्वेज टेस्ट, मैथ्स के लिए अलग से सेक्शन बनाए गए हैं। नए प्रारूप में रीजनिंग पहले की तरह अहम है। साथ ही वर्ड सेलेक्शन, प्रनन्सीएशन पर जोर दिया गया है। वोकैब्यलेरी पर विशेष जोर दिया गया है।
जीमैट : 22 के बजाए 16 दिन बाद परीक्षा
जीमैट हर 16 दिन में होगा, यह एक कंप्यूटर एडॉप्टिव टेस्ट है। इसके स्कोर से विभिन्न देशों में कॉलेजों के ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम में प्रवेश दिया जाता है। इसमें एनालिटिकल, राइटिंग, क्वांटिटेटिव, वर्बल और रीडिंग स्किल्स का टेस्ट होता है। इसमें सबसे अहम इंग्लिश ग्रामर, अलजेब्रा, ज्योमेट्री और अर्थमैटिक्स है। टेस्ट टेकर्स अब बिजनेस स्कूलों को बिना जानकारी दिए स्कोर को कैंसल कर सकते हैं। हालांकि जो स्कोर बिजनेस स्कूलों को भेजे जा चुके हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। जीमैट साल में पांच बार दिया जा सकेगा।
टॉफेल : विदेश शिक्षा के लिए जरूरी
12वीं या ग्रेजुएशन के बाद विदेश में शिक्षा लेने के लिए टॉफेल का स्कोर जरूरी है। इस लैंग्वेज टेस्ट का स्कोर दुनिया के सभी संस्थानों में मान्यता प्राप्त है। यह एग्जाम चार अलग सेक्शन में होता है। समय अवधि चार घंटे 30 मिनट होती है। इसमें रीडिंग, लिसनिंग, प्रश्नों के उत्तर बोलकर देने जैसे टेस्ट लिए जाते हैं। 2016 के पैटर्न में यूके, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के इंग्लिश एक्सेंट जोड़े जा सकते हैं। इससे पहले सिर्फ नॉर्थ अमेरिका के इंग्लिश एक्सेंट पर आधारित प्रश्न होते थे। एग्जाम की तैयारी के लिए टॉफेल की ऑफिशियल वेबसाइट पर मैसिव ओपेन ऑनलाइन कोर्स में पंजीकरण करा सकते हैं।