युवाओं को रोजगार देने के लिए शुरू की गई ‘हुनर से रोजगार तक’ योजना सिर्फ हुनर तक ही सिमटकर रह गई है। इस योजना के तहत युवाओं को ट्रेनिंग तो दी जा रही है, लेकिन ट्रेनिंग के बाद मिलने वाली सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
इतना ही नहीं, जिम्मेदारों के पास यह आंकड़ा तक उपलब्ध नहीं है कि पिछले तीन वर्षों में उन्होंने कितने युवाओं को रोजगार दिया है।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार हुनर से रोजगार तक योजना चला रही है।
पहले इसमें सिर्फ तीन महीने की ट्रेनिंग ही दी जाती थी, लेकिन बाद में इसको हुनर से रोजगार तक कर दिया गया। यानी ट्रेनिंग कराने वालों को ही युवाओं को रोजगार से जोड़ने की जिम्मेदारी दे दी गई।
तीन महीनें का चलाया जा रहा प्रशिक्षण कोर्स:
गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) की ओर से भी यह तीन महीने का प्रशिक्षण कोर्स विभिन्न होटलों में कराया जा रहा है। इसके तहत फूड एंड बेवरेज, हाउस कीपिंग, फूड प्रोडक्शन सेग्मेंट लिए गए हैं।
योजना के बाद युवाओं को दो जोड़ी ड्रेस, टावल, स्पून-नाइफ सेट, शूज, किताब आदि सामग्री के साथ ही 1500 और दो हजार रुपये स्टाई फंड के तौर पर दिए जाते हैं।
अधिकतर जगहों पर स्टाई फंड तो दे दिया गया, लेकिन यह सामग्री नहीं दी गई। विभाग के पास यह जवाब तक नहीं है कि करोड़ों खर्च करने के बाद आज तक उन्होंने कितने युवाओं को रोजगार दिया। सूत्रों की मानें तो योजना के तहत किसी को रोजगार दिया ही नहीं गया।