केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) का क्षेत्रीय कार्यालय उत्तराखंड सरकार की बेरुखी का शिकार हो रहा है। कार्यालय के लिए सीबीएसई लगातार तीन साल से जमीन की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार ने अब तक कहीं भी जमीन देने की जरूरत नहीं समझी। उधर, पश्चिमी यूपी के कई बड़े नेता क्षेत्रीय कार्यालय को मेरठ शिफ्ट कराने की कोशिशों में जुट गए हैं।
सीबीएसई ने तीन साल पहले देहरादून में अपना क्षेत्रीय कार्यालय खोला था। इस कार्यालय से पूरे उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के 22 जिले शामिल हैं। कार्यालय दून में तो खुला लेकिन पश्चिमी यूपी के स्कूल इसे दून के बजाय मेरठ ले जाने की कोशिशों में जुट गए। खासतौर से मेरठ और नोएडा, ग्रेटर नोएडा में कई नामी सीबीएसई स्कूल लगातार प्रयासरत हैं।
पश्चिमी यूपी के कई नेता भी रीजनल ऑफिस को दून लाने की कवायद में जुटे हुए हैं। इधर, सीबीएसई लगातार तीन साल से प्रदेश सरकार से रीजनल कार्यालय के लिए जमीन की मांग करता आ रहा है। इसके लिए सीबीएसई के क्षेत्रीय अधिकारी मनोज श्रीवास्तव न केवल डीएम बल्कि सीएम और कई मंत्रियों से भी मिल चुके हैं।
सीबीएसई इस जमीन के लिए कीमत भी देने को तैयार है लेकिन सरकार पैसा लेकर भी जमीन देने को तैयार नजर नहीं आ रही है। इस बेरुखी से अगर सीबीएसई के केंद्रीय कार्यालय का मन बदला तो यह क्षेत्रीय कार्यालय यहां से उत्तर प्रदेश में भी शिफ्ट हो सकता है। इस शिफ्टिंग से भारी नुकसान होगा।
यह है फायदा
पहले सीबीएसई उत्तराखंड के स्कूलों को अपने काम के लिए इलाहाबाद के चक्कर काटने पड़ते थे। दून में रीजनल ऑफिस बनने के बाद पिथौरागढ़ वाले स्कूल को भी दून आना ज्यादा आसान हो गया। खास बात यह है कि दून में कार्यालय होने से यहां राजस्व की भी वृद्धि होती है। 2100 से ज्यादा स्कूल इस कार्यालय से संबद्ध हैं। अगर उनमें से प्रतिदिन 20 लोग भी दून पहुंचते हैं तो उनके रहने-खाने से प्रदेश को फायदा होता है। यहां टीसी पर काउंटर साइन से लेकर सभी छोटे काम भी बेहद आसानी से हो जाते हैं।