पूरी दुनिया में विभिन्न स्तर पर धर्म, समुदाय, नस्ल, विचारधारा के नाम पर भयंकर मारकाट हो रही है व तनाव बना हुआ है। यूरोप में आई शरणार्थियों की बाढ़ से वहां हलचल मची हुई है। यूरोप समेत ब्रिटेन में भी धर्म व नस्ल को लेकर तनाव व टकराव का वातावरण बना हुआ है।
ऐसे में ब्रिटेन के विख्यात लीड्स बैकेट् विश्वविद्यालय के पांच छात्र दून में तिब्बती समाज के भारतीयों के साथ सामंजस्य और मेलमिलाप का अध्ययन करने पहुंचे हैं। ब्रिटेन के ये होनहार छात्र इस बात को देखकर मंत्रमुग्ध हैं कि दून में तिब्बतियों को प्रगति और विकास के शानदार अवसर मिल रहे हैं।
उनका कहना है कि उत्तराखंडी समाज ने जिस तरह से तिब्बतियों को गले लगाया और इनको खुद की पहचान कायम रखने देते हुए तरक्की के जो मौके दिए है वह खुद में नज़ीर है।
तिब्बती रिलीफ फंड परियोजना के तहत दून पहुंचे छात्र
ब्रिटेन के लीड्स बैकेट् विश्वविद्यालय से रीबैकेह पियरसन, एलेक्स ब्रूम, एलेक्स बोवर्स, हैयलेय ओगले, आर्थर ओलियने कुछ दिनों पहले ही दून पहुंचे हैं। यूनिवर्सिटी रिलेशनशिप प्रोग्राम और तिब्बती रिलीफ फंड परियोजना के तहत ये छात्र दून पहुंचे हैं।
ये लोग तिब्बती समाज, इनके जीवन के सभी आयामों, भारतीय समाज व राज्य व्यवस्था के साथ इनके संबंधों का अध्ययन करने यहां आ रखे हैं। इनके अध्ययन में इस बात पर विशेष जोर है कि भारतीयों के साथ इनके समरसतापूर्ण व सौहार्द्धपूर्ण संबंधों का राज क्या है।
समुदाय के जीवन को समझने का कर रहे प्रयास
इसलिए ये छात्र देहरादून के सभी तिब्बती संस्थानों में घूम-घूमकर समुदाय के जीवन के सभी पक्षों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इनकी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य-चिकित्सा ढांचे, धार्मिक सांस्कृतिक जीवन को तो ये समझ ही रहे हैं। लेकिन इनके अध्ययन के केंद्र में है भारतीय समाज के साथ इनका बेहद सौहार्द्धपूर्ण संबंधों का होना।
इस बाबत रीबैकेह पियरसन, एलेक्स ब्रूम, एलेक्स बोवर्स, हैयलेय ओगले, आर्थर ओलियने का कहना है हम इस फिनामिना को बहुत महत्व देते हैं। चूंकि ब्रिटेन भी संस्कृतियों का मेलटिंग पॉट है।