मानव रचना इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय एंटी डोपिंग कार्यशाला की शुरुआत शुक्रवार से हो गई। नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) व नेशनल डोप टेस्ट लैबोरेट्री (एनडीटीएल) के सहयोग से इसका आयोजन किया जा रहा है।
कार्यशाला का उद्देश्य स्टूडेंट्स को एंटी डोपिंग के बारे में जानकारी देना व उनको इस क्षेत्र में रोजगार के रास्तों के बारे में बताना है। प्रतिस्पर्धात्मक खेलों में खिलाड़ियों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली दवाइयों की प्रक्रिया को डोपिंग कहा जाता है।
इस प्रयोग को रोकने व इस पर नजर रखने की प्रक्रिया एंटी डोपिंग कहलाती है। यह प्रक्रिया खेल जगत में हमेशा से चर्चा में रही है। डॉ. अलका बेओत्रा ने कहा कि एंटी डोपिंग खेल के सिद्धांतों व उसके मूल्यों को सुरक्षित रखने का तरीका है।
मानव रचना शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत भल्ला ने कहा कि एंटी डोपिंग सुनिश्चित करता है कि खेल में दोनों पक्ष अपने स्तर पर बेहतर करें व दवाइयों व अन्य प्रतिबंधित पदार्थों के प्रयोग से विजेता न बनें।
इस मौके पर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. एनसी वाधवा, फैकल्टी ऑफ एप्लाइड साइंस के डीन डॉ. जीएल खन्ना, नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी की तरफ से डॉ. अंकुष गुप्ता मौजूद रहे। कार्यशाला में एमआरआईयू के अलावा दिल्ली यूनिवर्सिटी, जामिया हमदर्द व इंडिया स्पाइनल इंज्यूरी सेंटर से प्रतिनिधि मौजूद रहे।