गोल्ड फील्ड कॉलेज में पढ़ने वाले 400 छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। छात्रों का आरोप है कि कई महीनों से कॉलेज में पढ़ाई नहीं हो रही है। कॉलेज व अस्पताल पर ताला लगा हुआ है।
भविष्य सुरक्षित करने के लिए एमबीबीएस छात्रों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से गुहार लगाई है। शनिवार को छात्रों का प्रतिनिधिमंडल संसदीय सचिव सीमा त्रिखा से मिला और उसने मुख्यमंत्री का समय दिलवाने की मांग की।
इसपर संसदीय सचिव ने छात्रों को जल्द से जल्द मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया है। वहीं, प्रशासन ने कार्रवाई में तेजी लाते हुए मेडिलक कॉलेज की फिजिकल रिपोर्ट बनाकर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर), पंचकूला को भेज दी है।
बता दें छायसां स्थित गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च की शुरूआत 2010 में हुई। इंस्टीट्यूट का पहला बैच अभी ट्रेनी पीरियड से गुजर रहा है। लेकिन चार साल में इंस्टीट्यूट की आर्थिक हालत गड़बड़ा गई है।
आलम ये है कि एक साल के दौरान इंस्टीट्यूट के 45 शिक्षक वेतन न मिलने के कारण नौकरी छोड़ चुके हैं। पैसा फंसने के कारण अब सिर्फ दो शिक्षक ही इंस्टीट्यूट में कार्यरत हैं।
शुरूआत में एमबीबीएस में दाखिले के लिए 7 लाख पांच हजार रुपये फीस ली जाती थी। हॉस्टल फीस सवा लाख अलग से ली जाती है।
कॉलेज के 2014 के बैच की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इंस्टीट्यूट को वर्ष 2014 में दाखिले की अनुमति दी। लेकिन, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की शर्त पर।
इसके तहत इंस्टीट्यूट को 2014 बैच के एमबीबीएस छात्र से मात्र 60 हजार रुपये बतौर फीस ली जा सकती थी। इस फैसले ने इंस्टीट्यूट प्रबंधन की कमर तोड़ दी।
जिससे वो अभी तक उबर नहीं पा रहा है। कॉलेज के खराब हालात पर अब एमसीआई ने बैच 2015-16 को मान्यता देने से इंकार कर दिया है।