लैंगिक भेदभाव पर दिल्ली महिला आयोग ने राजधानी की 21 यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षण संस्थाओं को नोटिस भेजकर 15 दिनों में जवाब देने का निर्देश दिया है। आयोग ने यह नोटिस हॉस्टल में लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव के चलते दिया है। विश्वविद्यालयों समेत शिक्षण संस्थानों को दिव्यांग छात्रों के आने-जाने के समय समेत जुर्माना राशि की जानकारी भी देनी होगी।
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के मुताबिक, छात्राओं के संगठन ‘पिंजरा तोड़’ के सर्वे और दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में गर्ल्स हॉस्टल मामले में छात्रों ने शिकायत दी थी कि लड़के-लड़कियों में भेदभाव किया जा रहा है।
आयोग जुलाई में सत्र शुरू होने से पहले हॉस्टल संबंधी शिकायतों की जांच करना चाहता है, ताकि छात्राओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। नोटिस में पूछा गया है कि यूनिवर्सिटी व कॉलेज में कुल कितने छात्र-छात्राएं हैं।
कितने छात्रों को हॉस्टल की सुविधा दी गई है और उसमें कितने दिव्यांग छात्र शामिल हैं। विश्वविद्यालय व शिक्षण संस्थान प्रबंधन को हॉस्टल की खाली सीटों और सुविधाओं समेत फीस की भी जानकारी देनी होगी।
नोटिस दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों, एम्स, इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय, जामिया हमदर्द, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अंबेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट, आईआईटीएफटी, आईआईएफसी, इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ आदि को दिया गया है।