विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को कहा कि पायलटों की थकान के मुद्दे से निपटने के लिए प्रस्तावित नए मानदंडों से उन्हें एक सुविधाजनक व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। थकान के बारे में पायलटों के चिंताओं की पृष्ठभूमि में डीजीसीए ने नवंबर 2023 में उड़ान चालक दल के ड्यूटी समय को नियंत्रित करने वाले मानदंडों में विभिन्न बदलावों का प्रस्ताव दिया था। जिसमें पायलटों के लिए अधिक आराम का समय का प्रावधान भी शामिल था।
सिंधिया ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि पायलट थकान के मुद्दे के लिए नागर विमानन आवश्यकता (सीएआर) के प्रावधान पर फिर से गौर किया गया है। उन्होंने कहा, हम यह सुनिश्चित करने के लिए नियमों का एक नया सेट बना रहे हैं कि पायलटों की थकान न केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो। बल्कि, दुनिया में हमारे हिस्से में जल्दी सूर्योदय के अनुरूप भी हो।
उन्होंने कहा, 'हम नाइट शिफ्ट की अवधि का विस्तार करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे पायलटों के लिए अधिक सुविधाजनक व्यवस्था बन जाएगी।' मंत्री ने यह भी कहा कि नियामक 36 घंटे के आराम की अवधि के बजाय 48 घंटे आराम सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है।
दिसंबर में डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि नियामक को सीएआर में बदलाव को लेकर कई टिप्पणियां मिली हैं। अन्य बातों के अलावा, यह प्रस्तावित किया गया था कि एक एयरलाइन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक पायलट को दो स्थानीय रातों सहित निरंतर 48 घंटे का न्यूनतम साप्ताहिक आराम प्रदान किया जाए। ताकि एक साप्ताहिक विश्राम अवधि के अंत और अगले की शुरुआत के बीच 168 घंटे से अधिक समय न हो।
पायलटों की थकान का मुद्दा पिछले साल सितंबर में इंडिगो के एक पायलट की मौत के बाद सामने आया था,जो नागपुर हवाई अड्डे के बोर्डिंग गेट पर गिर गया था। एयर इंडिया और इंडिगो सहित प्रमुख विमानन कंपनियों ने पायलटों की थकान का विश्लेषण करने और उस पर नजर रखने के लिए उपकरण पेश किए हैं।
पिछले हफ्ते इंडियन पायलट्स गिल्ड (आईपीजी) और इंडियन कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) ने कहा था कि 'प्रतिशोध के डर' के बिना बीमारियों की जानकारी देना उड़ान की सुरक्षा के हित में है। आईपीजी एयर इंडिया में बड़े आकार के विमान पायलटों का निकाय है। जबकि, आईसीपीए उन पायलटों का प्रतिनिधित्व करता है जो नैरो-बॉडी एयरबस 320 परिवार के विमान उड़ाते हैं।