बिल्डर की लेटलतीफी से अक्सर मकान मिलने की बाट जोहने वाले खरीदारों को रियल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट (रेरा) के रूप में बड़ा हथियार मिला है। मैजिक ब्रिक्स की ओर से कराए गए एक सर्वे में 70 फीसदी से ज्यादा मकान खरीदारों का कहना है कि अगर उन्हें पजेशन मिलने मेें देरी हुई तो बिल्डर के खिलाफ रेरा में शिकायत करेंगे।
रेरा लागू होने के बाद अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) में भी निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में निवेश करने का भरोसा बढ़ा है। उन्हें लगता है कि नए कानून के तहत डेवलपर्स निवेशकों के पैसे लेकर भाग नहीं सकेंगे। हाउसिंग.कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, एनआरआई के निवेश से रियल एस्टेट क्षेत्र में एक बार फिर बहार लौट सकती है। पहले जहां तैयार और निर्माणाधीन मकानों में एनआरआई के निवेश का औसत 67:33 था, वहीं अब यह 56:44 पर आ गया है।
घरेलू रियल एस्टेट बाजार में सबसे ज्यादा मकान खरीदारी अमेरिका, यूएई, ब्रिटेन और सिंगापुर में रहने वाली प्रवासी भारतीय करते हैं। कुल एनआरआई की खरीद में इन चार देशों के खरीदारों की भागीदारी 55 फीसदी है, जिसमें से अकेले अमेरिका के 26.5 फीसदी खरीदार होते हैं। इसी तरह, यूएई और सिंगापुर में प्रत्येक के 9.1 फीसदी खरीदार शामिल हैं। इसके अलावा कुवैत, कनाडा, मलयेशिया, हांगकांग, बहरीन और फ्रांस के एनआरआई में भी भारत में प्रॉपर्टी खरीदने में दिलचस्पी बढ़ी है।
देश में प्रॉपर्टी खरीदने को लेकर एनआरआई का सबसे पसंदीदा शहर हैदराबाद है, जिसके बाद मुंबई और बंगलूरु का नंबर आता है। एनसीआर के गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद में भी एनआरआई मकान खरीदना पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य पसंदीदा शहरों में पुणे, अहमदाबाद, वडोदरा, कोच्चि और गोवा भी शामिल हैं।