मौजूदा विकास मॉडल देश में बेरोजगारी बढ़ा रहा है। ऐसे में सरकार को अधिक-से-अधिक रोजगार सृजन के लिए अपने विकास मॉडल को बदलना होगा और श्रम आधारित क्षेत्रों की ओर ध्यान केंद्रित करना होगा। साथ ही पड़ोसी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी देशों में समान रूप से प्रतिस्पर्धी होने के लिए देश में बेहतर एवं प्रासंगिक कौशल विकास के अवसर होने चाहिए। ऑक्सफेम इंडिया ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट ‘माइंड द गैप-स्टेट ऑफ इंप्लायमेंट इन इंडिया’ में कहा है कि गुणवत्तापूर्ण रोजगार का अभाव एवं बढ़ती वेतन असमानता भारतीय श्रम बाजार में विषमता के प्रमुख कारण हैं। रोजगार सृजन एवं लैंगिक न्याय समानता के दावे के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात काफी अलग हैं।
गलत नीतियों से बिगड़ी है रोजगार की स्थिति
ऑक्सफेम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा कि वास्तव में स्थितियां दुखद और परेशान करने वाली हैं। इसमें स्थानीय संरचनात्मक कारण है, जिससे रोजगार बाजार या रोजगार के संदर्भ में स्थिति बिगड़ी है। उन्होंने आगे कहा कि यह सरकार की गलत नीतियों और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश की कमी का दुष्प्रभाव है। इसके अलावा प्रगतिशील कराधान पर सरकार का जोर होना चाहिए। कंपनी कर में छूट देने को लेकर जो अतिरिक्त उत्साह दिख रहा है, उसे कम किया जाना चाहिए। इस प्रकार से मिले अतिरिक्त राजस्व का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा सुधारने के लिए करना चाहिए।
खतरनाक है बड़े स्तर पर मशीनीकरण अपनाना
ऑक्सफेम इंडिया की पॉलिसी रिसर्च एवं कैंपेन की निदेशक रेणु भोगल का कहना है कि देश में जिस तरह के कार्यबल हैं, उसके हिसाब से हम वैसे मॉडल को नहीं अपना सकते हैं, जिनका इस्तेमाल अन्य देश करते हैं। आखिर हमें बड़े स्तर पर मशीनीकरण क्यों अपनाना चाहिए? उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत यह है कि आपको श्रम गहन उद्योग और अवसरों की जरूरत है। ऐसा नहीं होने पर हम वास्तव में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संकट में फंस जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला कर्मचारियों की स्थिति ज्यादा नाजुक है। उन्हें उसी कार्य के लिए समान रूप से पढ़े-लिखे पुरुष सहयोगियों के मुकाबले 34 फीसदी कम वेतन मिलता है।