बिल्डरों को पूंजी नहीं दे रहे खरीदार
पुरी ने कहा कि ‘यहां मुर्गी पहले आई या अंडा’ जैसी स्थिति बन गई है। मकान खरीदारों ने देरी के कारण बिल्डरों को पूंजी देना बंद कर दिया है। बिल्डर चाहते हैं कि ग्राहक पहले पैसा दें ताकि काम पूरा हो सके। देरी के कारण परियोजनाओं की लागत बढ़ जाती है, जो पूंजी की कमी को और बढ़ा देती है।
रेरा लागू होने से पहले कई बिल्डरों ने बिना अनुमति के ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट लांच कर दिए, जिस कारण उनकी परियोजनाएं अटक गईं। उन्होंने कहा कि इनसॉल्वेंसी एंड बैकरप्सी कोड में संशोधन और बैंकों एवं लेनदारों के बराबर अधिकार देकर सरकार ने खरीदारों को हितों की रक्षा की है।
नई सरकार के पास चुनौती
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट ने कहा कि आगामी आम चुनावों के बाद जो भी सरकार सत्ता में आती है, उसे रियल एस्टेट क्षेत्र की बेहतरी और फंसी आवासीय परियोजनाओं के लिए काफी कार्य करना होगा। फंसी परियोजनाओं के कारण निर्माणाधीन संपत्ती खरीदने को लेकर खरीदारों में विश्वास कम हुआ है, जिसे सरकार को पुनर्जीवित करना होगा।
अगर खरीदार निर्माणाधीन संपत्तियों की खरीदारी बंद कर देते हैं तो बिल्डरों के पास परियोजना निर्माण के लिए बाहरी स्रोतों से धन प्राप्त करना अधिक चुनौतीपूर्ण होगा।