कोरोना वायरस ने देश की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी है। महामारी के इस दौर में कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, वहीं कई कर्मचारियों की सैलरी में कटौती की गई। ऐसे में लोग निवेश के विकल्प खोज रहे हैं। पिछले कुछ समय से निवेशकों की शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की ओर रुचि बढ़ी है। कई लोगों ने इनमें अपना पैसा लगया है। हालांकि शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश से आपको जो फायदा होता है, उस पर टैक्स लगता है। इस बीच एक बात का ध्यान रखें कि मुनाफे की प्रकृति यानी लान्ग टर्म, शॉर्ट टर्म, आदि के आधार पर निवेशकों पर लगने वाला टैक्स और उसकी दर बदल जाती हैं। आइए इसके बारे मे विस्तार से जानते हैं।
शेयर बाजार
- यदि निवेशक 12 महीने के भीतर ही शेयर बेच कर मुनाफा कमाते हैं, तो उस मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है। इस मुनाफे पर निवेशकों को 15 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स चुकाना होता है।
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के विपरीत अगर निवेशक किसी शेयर को 12 महीने बाद बेचते हैं और उन्हें मुनाफा होता है, तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है। इस पर आपको 10 फीसदी टैक्स का भुगतान करना होगा है। लेकिन ऐसा तभी करना होता है जब कुल मुनाफा एक लाख से ज्यादा हो।
- वहीं शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में अगर आप नुकसान में शेयर बेचते हैं, तो आगामी आठ वर्षों के भीतर तक आप उस नुकसान को कैरी फॉरवर्ड भी कर सकते हैं।
- अगर निवेशक इंट्रा-डे ट्रेडिंग करते हैं, यानी जिस दिन शेयर खरीदा है, उसी दिन बेच देते हैं, तो यह स्पेक्युलेटिव बिजनेस इनकम कहालाता है। सामान्य टैक्स स्लैब के अंदर स्पेक्युलेटिव बिजनेस इनकम के रूप में इसे जोड़ा जाएगा। इसके तहत अगर नुकसान होता है, तो वो कैरी-फॉरवर्ड हो सकता है, लेकिन सिर्फ चार वर्षों तक।
इक्विटी म्यूचुअल फंड
- अगर आपने शेयर नहीं, बल्कि म्यूचुअल फंड में अपना पैसा लगाया है, तो निवेश के एक साल तक इक्विटी म्यूचुअल फंड (जिनका 65 फीसदी हिस्सा इक्विटी है) की यूनिट बेचने से होने वाले मुनाफे पर 15 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। इसके साथ ही निवेशकों से चार फीसदी सेस भी वसूला जाता है।
- निवेश की अवधि से एक साल बाद होने वाले मुनाफे पर 10 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। इसपर भी चार फीसदी सेस लगाया जाता है। मालूम हो कि एक लाख रुपये से कम के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता।
- इक्विटी म्यूचुअल फंड की ओर से दिए गए डिविडेंड पर कर नहीं लगता, लेकिन एएमसी 11.648 फीसदी की दर से डीडीटी का भुगतान करती है।
डेट फंड
- डेट फंड में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के लिए न्यूनतम होल्डिंग अवधि तीन साल होती है। यदि निवेशक निवेश के तीन साल के अंदर यूनिट बेचते हैं, तो उससे होने वाले मुनाफे को निवेश की आय में जोड़ा जाता है और निवेशक की टैक्स स्लैब के अनुसार आयकर लगता है।
- इसके विपरीत निवेश के तीन साल बाद यूनिट बेचने पर जो मुनाफा होता है, उस पर इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी कर लगता है।
- डेट फंड में फंड हाउस निवेशकों को डिविडेंड बांटने से पहले 29.120 फीसदी की दर से डीडीटी का भुगतान करना होता है। शेयर बाजार की ही तरह यहां भी आप नुकसान को आठ सालों तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं।