एक जुलाई से म्यूचुअल फंड खरीदने पर निवेशकों को उस पर स्टांप ड्यूटी भी देनी होगी। चाहे आप सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) और सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) के जरिए भी म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रहे हो, तब भी आपको स्टांप ड्यूटी देनी होगी।
मान लीजिए आपने एक लाख रुपये डेट फंड में डाले, जिस पर पांच फीसदी सालाना रिटर्न मिल रही है। इसका मतलब यह हुआ कि आपको एक साल के बाद उस पर 5,000 की रिटर्न मिलेगी और एक महीने के 416 रुपये। अब इस पर पांच रुपये के हिसाब से स्टांप ड्यूटी लगेगी।
अगर आप इस फंड में निवेश तीन महीने तक करेंगे तो तीन महीने के हिसाब से 1,248 रुपये हो जाएंगे। इस पर भी पांच रुपये के हिसाब से स्टांप ड्यूटी लगेगी लेकिन जितने लंबे समय के लिए आप निवेश जारी रखेंगे, उतना ही स्टांप ड्यूटी का असर कम होगा।
रिटेल निवेशक सामान्य तौर पर लिक्विड फंड में निवेश करते हैं ना कि ओवरनाइट फंड में। अगर एक महीने से ज्यादा की होल्डिंग है तो स्टांप ड्यूटी के लगने से ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।