फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये हैं इनकम टैक्स से जुड़ी गलतफहमियां, आप भी जानें

विज्ञापन
विज्ञापन
जब भी हम आयकर कानून की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले इसकी जटिलता का ख्याल आता है। आयकर विभाग ने आम जनता के लिए कर कानूनों को आसान बनाने के कई प्रयास किए हैं, लेकिन अब भी इस कानून में कई ऐसी बातें हैं जिनकी जानकारी भारतीयों को नहीं है अथवा उन्हें गलत तरीके से समझा जाता है।
विज्ञापन


अमर उजाला ने माईआईटीरिटर्न डॉट कॉम के प्रबंध निदेशक साकार यादव से बात की और आयकर कानून के बारे में ऐसी ही कुछ गलत फहमियों को दूर करने और शंकाओं का समाधान करने का प्रयास किया है।

क्या नियोक्ता द्वारा टीडीएस काटे जाने पर आयकर रिटर्न भरने की जरूरत नहीं?

यह एक गलतफहमी है कि यदि नियोक्ता द्वारा टीडीएस काटा जाता है, तो आपको अपना आयकर रिटर्न भरने की चिंता करने की जरूरत नहीं। क्योंकि आपकी ओर से चुकाए गए कर का यह कतई तात्पर्य नहीं है कि टैक्स रिटर्न भरने की आवश्यकता नहीं। यदि वित्त वर्ष 2015-16 में करयोग्य आय 2,50,000 रुपये से अधिक है, तो आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है।
विज्ञापन

टीडीएस कटने पर

यदि टीडीएस काटा जा रहा है, तो अतिरिक्त आयकर भरने की कोई आवश्यकता नहीं है

अधिकांश मामलों में यह देखा गया है कि कर अदाकर्ता को लगता है कि सावधि जमा पर ब्याज, किराये की आमदनी, इत्यादि जैसी अन्य आमदनी अर्जित की जाती है जिस पर कोई कर नहीं लगता अथवा इस आय पर वास्तविक कर से निचली दरों पर कर वसूला जाता है या कर चुकाने वाला अपने आयकर रिटर्न में इसका उल्लेख नहीं करता। इन सभी मामलों में, कर चुकाने वाले व्यक्ति को अपने रिटर्न में सभी बातों का उल्लेख करना चाहिये और उसे इस पर अतिरिक्त आयकर अदा करना पड़ सकता है।

अपने घर में रहने पर नहीं कर सकते एचआरए की करछूट का दावा

कर चुकाने वाले व्यक्ति को हाउस रेंट भत्ता (एचआरए) पर किसी भी छूट का दावा करने की अनुमति नहीं है यदि वह अपने खुद के घर में निवास करता है अथवा उसके द्वारा किसी को किराया अदा नहीं किया जा रहा अथवा उसका घर उसी शहर में है।

एफडी की आय पर टैक्स

एफडी की आय पर लगता है आयकर

बचत बैंक खाते में जमा पर कमाई गई 10,000 रुपये तक की ब्याज से होने वाली आय कर मुक्त है, लेकिन सावधि जमा के अंतर्गत प्राप्त ब्याज आयकर कानून के तहत कर योग्य है।

एनएससी पर ब्याज की आय कर मुक्त नहीं

नेशनल सेविंग्स सार्टिफिकेट (एनएससी) नियमों में उल्लिखित वार्षिक एनएससी पर ब्याज बढ़ोत्तरी के आधार पर एनएससी से मिलने वाले ब्याज पर कर वसूला जाता है। इसे आपकी कुल आय के हिस्से के रूप में मानना चाहिये। हालांकि इसे दोबारा निवेश किया जाए, तो यह धारा 80-सी के तहत कटौती के योग्य है।

सभी दानों पर शत-प्रतिशत कर छूट नहीं

आम धारणा है कि सभी डोनेशन यानी दान 100 प्रतिशत छूट के योग्य होते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। निजी धर्मार्थ संगठनों को किए गए अधिकांश दान में दान की गई राशि में 50 फीसदी की ही छूट मिलती है।
विज्ञापन

एचआरए पर टैक्स छूट

एचआरए न मिलने या स्वरोजगार वालों को भी मिल सकती है किराये पर कर छूट

एचआरए (स्वरोजगार अथवा अन्य) प्राप्त करने वाले व्यक्ति के बजाय, ऐसे व्यक्ति पर निवास पर किराये का भुगतान करने के लिए आयकर कानून की धारा 80 जीजी के तहत कटौती उपलब्ध है, लेकिन चुकाए गए किराये की कटौती में कुछ शर्तें अनिवार्य हैं और अधिकतम कटौती 24,000 रुपये से अधिक नहीं हो सकती।

दोस्त से नकद या प्रॉपर्टी उपहार में मिलने पर देना पड़ सकता है कर

यदि वित्त वर्ष के दौरान यह राशि 50,000 रुपये से कम है तो आपको कर चुकाने की जरूरत नहीं है, लेकिन यदि राशि 50,000 रुपये से अधिक है तो पूरी राशि पर कर लगेगा। हालांकि, एक अच्छी खबर यह है कि शादी के अवसर पर किसी व्यक्ति से प्राप्त राशि या प्रॉपर्टी आयकर से पूरी तरह मुक्त होती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें