फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्याज दरों में हो सकती है आधा फीसदी की कटौती, ईएमआई में दिखेगा असर

Thu, 04 Apr 2019 10:40 AM IST
अनिल पांडेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
- फोटो : self
विज्ञापन

होम लोन हो या कार लोन या पर्सनल लोन, इसके ईएमआई में कटौती की आस लगाये लोगों को रिजर्व बैंक से सस्ते ब्याज दर की सौगात मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय अर्थव्यवस्था के जो हालात हैं, ऐसें में रेपो दर में कम से कम आधा फीसदी की कटौती होने की संभावना है।

विज्ञापन


उल्लेखनीय है कि बैंकिंग क्षेत्र के नियामक रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमेटी -एमपीसी- की द्विमासिक समीक्षा बैठक बुधवार को शुरू हो चुकी है। इस पर आर्थिक जगत की इसलिए भी ज्यादा नजर है, क्योंकि यह चालू वित्त वर्ष की पहली समीक्षा बैठक है। सुबह 11.45 पर बजे रिजर्व बैंक इस बात का एलान करेगा। 

आर्थिक विश्लेषकों की बात करें या फिर क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की, उनका कहना है कि इस समय महंगाई की दर काबू में है। साथ ही इस समय औद्योगिक उत्पादन की गति भी कुछ कुंद है। इसलिए यह ब्याज दर में कटौती के लिए उपयुक्त समय है।
विज्ञापन


रिजर्व बैँक नीतिगत ब्याज दर में एक बार फिर से चौथाई फीसदी से लेकर के आधा फीसदी तक की कटौती कर सकता है। इससे पहले, बीते फरवरी में रिजर्व बैंक ने रेपो दर में चौथाई फीसदी की कमी की थी जो कि पिछले डेढ़ साल में पहली कटौती थी। ज्ञातव्य है कि केंद्रीय बैंक द्वारा वाणिज्यिक बैंकों को अल्पावधि ऋण जिस ब्याज दर पर मुहैया करवाया जाता है उसे रेपो रेट कहते हैं।

एचडीएफसी बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई में कमी आने से रिजर्व बैँक के पास आर्थिक विकास को सहारा प्रदान करने के लिए समायोजी रुख अपनाने का मौका है। आनंद राठी शेयर्स एंड स्टाक ब्रोकर्स के मुख्य अर्थशास्त्री तथा कार्यकारी निदेशक सुजन हाजरा का कहना है कि अर्थव्यवस्था का कमजोर वृद्धि परिदृश्य तथा महंगाई की दर में नरमी को देखते हुए रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में कटौती नहीं होने का कोई कारण नहीं है।

उनके मुताबिक सवाल यह है कि क्या बैंक ब्याज दर में चौथाई फीसदी से अधिक कटौती करेगा। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इकरा का अनुमान है कि आगामी मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दर में चौथायी फीसदी की कटौती की जा सकती है।

इससे पहले एसोचैम-ईग्रो फाउंडेशन की ओर से सोमवार को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर आयोजित एक परिचर्चा में पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद विरमानी ने कहा था कि मौद्रिक नीति में ढील का यह बहुत उपयुक्त समय है।

इसमें इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एवं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य असीमा गोयल और कोटक महिंद्रा बैंक की उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज भी शामिल थीं। उस दौरान अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया था कि रिजर्व बैँक को अपनी मौद्रिक समीक्षा बैठक में कम से कम 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करना चाहिए। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें