जीवन बीमा पॉलिसी लेने वाले उन लोगों को अब 10-15 प्रतिशत छूट मिल सकती है, जो इसका इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट अपनाते हैं। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (इरडा) ने जीवन बीमा को लेकर रीपोजिटरीज और डिमैटेरियलाइजेशन के संदर्भ में नियमों में कुछ बदलाव किए हैं।
नियमों के बदलाव पर इरडा ने कहा है कि जीवन बीमा लेने वालों में से सिर्फ वही व्यक्ति इस छूट की पेश कर सकता है, जो जीवन बीमा पॉलिसी के इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट (डीमैट) को अपनाता है। बीमा पॉलिसी को इलेट्रॉनिक फॉर्मेट में ढालने का काम सीएएमएस रिपोजिटरी सर्विसेस 5 अन्य रिपोजिटरी के साथ मिलकर कर रही है।
शेयर ट्रेडिंग जैसी हो जाएगी पॉलिसी
बीमा पॉलिसी को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखना सुरक्षित और सुविधाजनक होता है, जैसे शेयर के संदर्भ में होता है। बीमा रिपोजिटरी बनाने का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को पॉलिसी इलेट्रॉनिक रूप में रखने की सुविधा मुहैया कराना है।
विशेषज्ञों के अनुसार जीवन बीमा के प्रीमियम 10-15 प्रतिशत की छूट मिल सकती है। रिजर्व बैंक ने बीमाकर्ताओं को बतौर ब्रोकर काम करने की अनुमति भी दे दी है। इन सबका उद्देश्य देश में बीमा को बढ़ाना है।
इसके अलावा, इरडा ने प्रमुख और गैर प्रमुख दोनों तरह की गतिविधियों के लिए आउटसोर्सिंग को लेकर नियमों में कुछ खास संशोधन किए हैं।
क्यों मिलेगी ये छूट
अभी तक जीवन बीमा पॉलिसी कागजों भरी जा रही थी, जिसमें समय और पैसा दोनों ही अधिक लग रहे थे। बीमा इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में न होने से इसके रख-रखाव पर भी कंपनियों को काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा था।
जीवन बीमा पॉलिसी के इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में आ जाने के बाद कंपनियों का खर्च कागजों की खरीद और उनके रख-रखाव में काफी कम हो जाएगा, जिससे कंपनियों की लागत में कमी आएगी।
कंपनी की लागत में कमी आने के कारण वह अपने ग्राहकों को इसका फायदा देंगी और उन्हें प्रीमियम में छूट देंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह छूट 10-15 प्रतिशत तक हो सकती है।