यह एक बहुत अच्छी पॉलिसी है, क्योंकि इसे आपके मौजूदा बैंक खाते से जोड़ा जा सकता है और इसमें कागजी कार्रवाई भी कम करनी पड़ती है। इसका प्रीमियम ऑटो डेबिट सुविधा से स्वत: ही नियत तारीख को खाते से निकल जाता है। इससे पॉलिसी के खत्म होने का जोखिम नहीं है। पॉलिसीधारक आयकर की धारा 80 सी के तहत आयकर में छूट के हकदार भी होते हैं।
पीएमजेजेबीवाई का प्रबंधन
इस योजना का प्रबंधन भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और अन्य निजी जीवन बीमा निगम कंपनियां करती हैं। इसे लेने से आपको अपने बैंक से पता करना होगा कि वह इस योजना से संबद्ध है या नहीं और आवेदन के लिए क्या औपचारिकताएं पूरी करनी हैं। यों तो आप किसी वर्ष के किसी भी समय जुड़ सकते हैं और प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं, लेकिन इसकी प्रीमियम की रिनुअल (नवीनीकरण) की तिथि एक जून तय की गई है।
यह जानना जरूरी है कि आपकी पॉलिसी का दावापूर्ति वही बीमा कंपनी करती है, जिसने इसे जारी किया है। नॉमिनी को भुगतान के लिए पॉलिसी धारक की मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ उस बैंक से संपर्क करना होगा, जहां के खाते से यह पॉलिसी जुड़ी थी। हो सकता है कि नॉमिनी से जरूरत पड़ने पर कुछ और दस्तावेज भी मांगे जाएं। बैंक और बीमा कंपनी को दावे से संबंधित दस्तावेज मिलने के बाद एक महीने के भीतर दावापूर्ति करनी होती है।
क्या पीएमजेजेबीवाई पर्याप्त है?
संतोष प्रकाश अभी 29 साल के हैं और यदि उनके पास कोई और जीवन बीमा पॉलिसी नहीं है, तो उन्हें तुरंत पीएमजेजेबीवाई लेनी चाहिए। हालांकि सिर्फ इतना प्रयाप्त नहीं हो सकता, क्योंकि जीवन की वास्तवित जरूरतें भीन्न हो सकती हैं। उन्हें सुझाव है कि वह पूरी तरह से सिर्फ इसी पॉलिसी पर निर्भर न हों, उन्हें अपनी बीमा संबंधी जरूरतों का आकलन और अपनी क्षमता के अनुरूप अन्य पॉलिसी पर विचार करना चाहिए।