निवेशकों ने वित्त वर्ष 2017-18 में इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड (एमएफ) स्कीम में 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जिसके साथ ही यह लगातार चौथा साल है, जब इसमें विनिवेश पर निवेश हावी रहा। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एंफी) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
छोटे निवेशकों की वजह से बढ़ा निवेश
आंकड़ों के मुताबिक, आलोच्य अवधि के दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंड का एसेट बेस 38 फीसदी बढ़कर 7.5 लाख करोड़ रुपये का हो गया। ऑनलाइन एमएफ निवेश प्लेटफॉर्म ग्रो के सीओओ हर्ष जैन ने बताया कि इस आकर्षक निवेश का श्रेय उद्योग द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियान, एमएफ डिस्ट्रिब्यूशन प्लेटफॉर्म द्वारा निभाई गई भूमिका, नोटबंदी के प्रभाव तथा खासकर छोटे शहरों के खुदरा निवेशकों द्वारा बढ़-चढ़कर की गई हिस्सेदारी को दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, निवेशकों का झुकाव अब रियल एस्टेट तथा सोने जैसे पारंपरिक परिसंपत्ति वर्ग से वित्तीय परिसंपत्ति वर्ग की तरफ बढ़ रहा है।
एसआईपी करने वालों की हुई बढ़ोतरी
जैन ने बताया कि सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में भारी बढ़ोतरी ने उद्योग की निरंतर वृद्धि को बढ़ावा दिया है, क्योंकि ज्यादा से ज्यादा लोग बड़ी रकम के एकमुश्त निवेश की अवधारणा से खुद को अलग कर रहे हैं।
एंफी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 में इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ईएलएसएस) में 1,71,069 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ, जो इसके पिछले वित्त वर्ष में लगभग 70 हजार करोड़ के निवेश की तुलना में काफी अधिक है।