अक्सर लोग बड़ी खरीदारी के लिए त्योहारों का इंतजार करते हैं और नकदी के अभाव में इस खर्च को पूरा करने के लिए उन्हें या तो क्रेडिट कार्ड पर निर्भर होना पड़ता है अथवा कर्ज लेते हैं। दोनों ही परिस्थितियों में ईएमआई चुकाने के लिए बैंक को भारी-भरकम ब्याज चुकाना होता है। इसके उलट अगर खरीदारी के लिए योजना बनाएं और पहले ही एसआईपी के जरिये निवेश शुरू कर दें तो ग्राहक दोहरा लाभ उठा सकते हैं।
आपके मोटे खर्च को वसूलने के लिए बैंक कुल राशि को ईएमआई में बदल देते हैं और लंबे समय तक उपभोक्ता से मोटा ब्याज वसूलते हैं। इससे आपकी जरूरत उस समय तो पूरी हो जाती है, लेकिन लंबी अवधि तक आप ईएमआई के जाल में फंसे रह जाते हैं। दूसरी ओर, अगर उपभोक्ता सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप) के जरिये म्यूचुअल फंड में उतनी ही राशि हर महीने निवेश करे तो जितने समय की ईएमआई करानी है, उतनी ही अवधि में बड़ी राशि एकत्र हो जाएगी। यह कदम न सिर्फ आपको कर्ज के बोझ से बचाएगा, बल्कि आपके निवेश पर ब्याज के रूप में मोटा रिटर्न भी मिलेगा। सबसे जरूरी बात यह है कि ईएमआई चुकाने के लिए भी आपको आमदनी में से निश्चित राशि खर्च करनी होगी और निवेश के लिए भी यही राशि लगा सकते हैं।
मान लीजिए आप दिवाली पर आईफोन का नया मॉडल खरीदना चाहते हैं, जिसकी कीमत करीब 1.20 लाख रुपये है। इसके लिए क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया गया, बैंक से सालाना 12 फीसदी की दर से फाइनेंस कराया और भुगतान के लिए 36 महीने की ईएमआई बनाई गई तो हर महीने करीब 4,160 रुपये का भुगतान करना होगा। ऐसे में आपका कुल भुगतान करीब 1.50 लाख रुपये आएगा। यानी इस खरीद पर बैंक ने आपसे ब्याज के रूप में 30 हजार रुपये अधिक वसूले। वहीं, इसी राशि को आप 36 महीने तक एसआईपी के जरिये निवेश करते हैं, तो सालाना 12 फीसदी ब्याज मिलेगा और कुल पूंजी 1.75 लाख रुपये की तैयार हो जाएगी। इस तरह आपको दोहरा लाभ कमाने का मौका मिलेगा।