हममें से बहुत से लोग अपनी कर बचत निवेश से जुड़े फैसले ऐन वक्त में लेते हैं। चूंकि, अब कंपनियों ने अपने कर्मचारियों से निवेश घोषणा (इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन) के प्रमाण मांगने शुरू कर दिए हैं, ऐसे में कई लोग निवेश करने की तैयारी करने लगे हैं। निवेशकों के लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) या म्यूचुअल फंड की टैक्स सेविंग स्कीम भी अच्छा विकल्प हो सकती हैं।
म्यूचुअल फंड जैसे बाजार से जुड़े निवेश में पैसा लगाने से पहले निवेशक को यह फैसला करना पड़ेगा कि जब शेयर मार्केट अपने उच्चतम स्तर के करीब है, क्या ऐसे में इन स्कीम में पैसा लगाने का तुक बनता है। म्यूचुअल फंड विशेषज्ञों का कहना है कि इन स्कीमों में निवेश से आपको आयकर बचाने में तो मदद मिलती ही है, आपको इन्हें शेयरों में निवेश के माध्यम के रूप में देखना चाहिए।
ईएलएसएस मूलरूप से डेडिकेटेड म्यूचुअल फंड स्कीम होती हैं, जो कि शेयरों में निवेश करती हैं और इनमें तीन साल की लॉक-इन अवधि होती है। कोई भी निवेशक ईएलएसएस में 1 लाख रुपये तक निवेश कर सकता है और इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 80 सी के तहत कर छूट का दावा कर सकता है। कैलेंडर साल 2012 में इन स्कीमों का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा और इन्होंने औसतन 30.95 फीसदी रिटर्न निवेशकों को दिया। हालांकि, निवेशक अब इन स्कीमों के प्रदर्शन को लेकर चिंतित हैं।
म्यूचुअल फंड्स के प्रदर्शन पर नजर रखने वाली मार्निंगस्टार के मुताबिक बतौर कैटेगरी कर बचाने वाले (टैक्स सेविंग) म्यूचुअल फंड्स ने 31 दिसंबर 2012 को खत्म तीन साल की अवधि के दौरान निवेशकों को 6.02 फीसदी का रिटर्न दिया। वहीं, इस अवधि के दौरान बीएसई-200 ने महज 3.6 फीसदी का रिटर्न दिया।
पिछले पांच साल के दौरान बीएसई-200 (0.6) फीसदी और कर बचाने वाले फंड (1.81) फीसदी दोनों में ही निवेशकों का पैसा डूबा है। ये आंकड़े निवेशकों को रास नहीं आएंगे, खासतौर से ऐसे समय में, जबकि शेयर बाजार अपने उच्चतम स्तर के करीब है। कई निवेशकों को ईएलएसएस में नुकसान उठाना पड़ा है और कुछ इनवेस्टर्स ने बाजार की हालिया तेजी में मुनाफा कमाकर अपने पुराने निवेश से बाहर निकल आए हैं।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया के मासिक आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में ईएलएसएस फंड्स में 1,686 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई है। हालांकि, इनवेस्टमेंट विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में ईएलएसएस कैटेगरी में निवेशकों को अच्छा रिटर्न हासिल होगा।
उनका कहना है कि बतौर एसेट क्लास इक्विटी के अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है, क्योंकि जल्द ही ब्याज दरों में नरमी का दौर शुरू होगा। फिलहाल भारतीय इक्विटीज अपने ऐतिहासिक औसत से थोड़े ही नीचे है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जैसे ही अर्निंग ग्रोथ में तेजी आएगी, वैल्यूएशन में थोड़ा सुधार आना चाहिए। इससे ईएलएसएस में निवेश करने वाले निवेशकों को निश्चित तौर पर फायदा मिलेगा।
मार्निंगस्टार इंडिया के मुताबिक 31 दिसंबर 2012 को समाप्त हुई पांच साल की अवधि में 40 फीसदी स्कीमों ने बीएसई-100 इंडेक्स से कमजोर प्रदर्शन किया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों में निवेश के कारण कर बचाने वाले फंड्स ने हाल में अच्छा प्रदर्शन किया है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हमारी निवेशकों को यही सलाह होगी कि वे लार्ज कैप शेयरों में अधिक निवेश करने वाली टैक्स सेवर स्कीम में पैसा लगाएं, जिससे जोखिम कम किया जा सके। कई बार निवेशक ये सोचते हैं कि ईएलएसएस में निवेश की अवधि केवल 3 साल की ही है, ऐसा बिलकुल नहीं है।
इन स्कीमों में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है कि आप तीन साल बाद निवेश से बाहर निकल जाएं। अगर आपने अच्छी स्कीम में निवेश किया है, तो आप उसमें लंबी अवधि तक अपना निवेश बनाए रख सकते हैं।
जरूरत के हिसाब से हो निवेश
-तुरंत रिटर्न चाहिए सीनियर सिटीजन निवेश (अगर आप 60 साल से अधिक हों या सेवानिवृत 58
साल से अधिक हों, हर तिमाही मिलेगी पेंशन)
-तीन साल में रिटर्न ईएलएसएस फंड
-5-6 साल में रिटर्न एनएससी, बैंक एफडी, पीपीएफ
-10 साल में रिटर्न एनएससी, पीपीएफ
-10 साल के बाद यूलिप और बीमा योजनाएं