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चिंता-मनी 6: सही जीवन बीमा पॉलिसी का चुनाव कैसे करूं?

Tue, 18 Aug 2020 04:07 PM IST
‌डिंपल अलवधी नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार, नई दिल्ली
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जीवन बीमा पॉलिसी - फोटो : pixabay
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लॉकडाउन के दौरान नोएडा के रवि गुप्ता ने पाया कि वह साल भर में आठ जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए 78,000 रुपये का प्रीमियम भरते हैं। जबकि आश्चर्यजनक रूप से इन सभी पॉलिसियों से उन्हें 32 लाख रुपये से भी कम की राशि मिलनी है। वह समझ ही नहीं पा रहे थे कि उनका इंश्योरेंस कवर इतना कम क्यों है। 38 साल के रवि गुप्ता जिस समस्या का सामना कर रहे हैं। वह अनेक भारतीयों की समस्या है, जो आंख मूंदकर एक के बाद एक जीवन बीमा पॉलिसी में निवेश करते जाते हैं, बिना यह समझे कि ऐसा वे क्यों कर रहे हैं और इससे उन्हें क्या हासिल होने वाला है?

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जीवन बीमा की अनेक तरह की पॉलिसियां हैं, जिन्हें विभिन्न कंपनियों के द्वारा अलग-अलग अवधि के लिए जारी किया जाता है। प्रत्येक जीवन पॉलिसी अलग तरह के उद्देश्यों की पूर्ति करती है। इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि हर पॉलिसी किस तरह काम करती है और आप उससे किस तरह लाभान्वित हो सकते है।

जीवन बीमा क्या है?
जीवन बीमा वस्तुतः मृत्यु जोखिम के खिलाफ एक वित्तीय कवच है। आपकी अनुपस्थिति में आपके परिवार के वित्तीय संरक्षण के लिए जीवन बीमा बेहद जरूरी है। यह आपके वित्तीय लक्ष्य के लिए पूरक का काम कर सकता है और जब आप होम लोन जैसा लंबी अवधि का कर्ज लेते हैं, तब आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होता है।

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अगर आपकी असमय ही दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो जाती है, तब इंश्योरेंस कवर से आपके द्वारा लिया गया कर्ज चुकता हो जाता है और इस तरह से आपके परिवार पर वित्तीय दबाव नहीं पड़ता है। जीवन बीमा आपके और बीमा कंपनी के बीच एक वैधानिक अनुबंध होता है, जिसके लिए आप समय-समय पर भुगतान (जिसे प्रीमियम राशि कहते हैं) करते हैं, जिसके बदले में आपको अपने जीवन के खतरे के लिए इंश्योरेंस कवर मिलता है। 

व्यापक तौर पर जीवन बीमा पॉलिसियां तीन तरह की होती हैं, एक वह जो सिर्फ जीवन के खतरे को कवर करती है, दूसरी वह जो रिस्क कवर को सेविंग्स के साथ जोड़ती है, और तीसरा जो रिस्क कवर को निवेश के साथ मिलाती है।

पहले तरह के पॉलिसी को टर्म इंश्योरेंस कहते हैं, जिसका प्रीमियम कोम होता है लेकिन उसका रिस्क कवर ज्यादा होता है। दूसरी तरह की पॉलिसी को इंडोमेंट प्लांस और उसी के अलग प्रकार के मनी बैक प्लांस की तरह होते हैं, जिसमें हर बीतते साल के साथ तयशुदा राशि जुड़ जाती है। रिस्क कवर और निवेश को मिलाकर बनी तीसरे तरह की जीवन बीमा पॉलिसी यूनिट लिंक्ड प्लांस होते हैं, जो बाजार से जुड़े होते हैं, और प्रीमियम का बड़ा हिस्सा बचत और निवेश में चला जाता है। रवि गुप्ता के पास जो जीवन बीमा पॉलिसियां हैं, उनमें से अधिकांश दूसरे और तीसरे प्रकार के हैं।
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कितनी जीवन पॉलिसियां होनी चाहिए?
अपने जीवन की कीमत आंक पाना कठिन है। पर बहुत-सी जीवन बीमा पॉलिसियां लेने वालों के लिए यह जानना जरूरी है। अपने जीवन की कीमत आंकने को ह्यूमन लाइफ वैल्यू (एचएलवी) कहते हैं। जीवन बीमा पॉलिसियां इसी का इस्तेमाल कर एक तय इंश्योरेंस राशि तक पहुंचती है, जिसे एश्योर्ड सम कहते हैं। आपको कितना एश्योर्ड राशि जीवन बीमा पॉलिसी चाहिए, इसका आकलन करने के लिए तीन कदम उठाने पड़ेंगे।
  • पहला कदम: अपनी संपत्ति के मूल्य की गणना कीजिए। (जिसके भी आप मालिक हैं, बैंक बैलेंस, निवेश की कीमत, संपत्ति, सोना आदि) 
  • दूसरा कदम: लंबे समय में अपना वित्तीय देनदारी का आकलन करें। (कर्ज चुकाना, बच्चों की शिक्षा की जरूरतें या पति/पत्नी के लिए रिटायरमेंट का फंड आदि)
  • तीसरा कदम: आपके जीवन बीमा कवर की राशि।
बेशक बहुत-से लोग इतने का जीवन बीमा कवर नहीं ले पाते। पर उन्हें जीवन बीमा पॉलिसी लेनी चाहिए, जिसका कवर ज्यादा हो। इस लिहाज से कम प्रीमियम और ज्यादा कवर वाली पॉलिसी लेनी चाहिए, जिसे टर्म इंश्योरेंस कहते हैं। जैसे, 40 साल के एक व्यक्ति को 75 लाख रुपये के टर्म इंश्योरेंस के लिए साल में 15,000 से 18,000 रुपये का प्रीमियम भरना होगा। रवि गुप्ता को इससे सीख लेनी चाहिए। उन्हें इसका आकलन करना चाहिए कि उन्हें कितने की इंश्योरेंस की जरूरत है और इसी हिसाब से अपनी मौजूदा पॉलिसियों का मूल्यांकन करते हुए जरूरी बदलाव करने चाहिए, ताकि उन्हें पर्याप्त इंश्योरेंस मिल सके।      
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