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चिंता-मनी 5: क्या एफडी बंद कर देना ठीक रहेगा?

Mon, 17 Aug 2020 04:25 PM IST
‌डिंपल अलवधी नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार, नई दिल्ली
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निवेश - फोटो : pixabay
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संजय रावत का बैंक एफडी (सावधि जमा) जल्दी ही मैच्योर होने वाला है और वह तय नहीं कर पा रहे हैं कि इसे और दो साल के लिए आगे बढ़ाया जाए या नहीं। 25 साल के संजय रावत नैनीताल में एक ऑर्गेनिक प्रड्यूसर के तौर पर काम करते हुए खुश हैं। वह अपने माता-पिता के साथ रहते हैं और उनकी कोई अनिवार्य आर्थिक जिम्मेदारी नहीं है, इसलिए उन्होंने बैंक में एफडी खोलकर उसमें निवेश करना शुरू किया, जो अब मैच्योर होने वाला है। चूंकि दो साल के एफडी पर अब 6.1 फीसदी ब्याज है, जो उनको मिल रहे सात फीसदी ब्याज से कम है, ऐसे में, वह तय नहीं कर पा रहे हैं कि एफडी जारी रखें या मैच्योरिटी के बाद रकम निकाल लें।

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सहज और शक्तिशाली औजार
जो भारतीय गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, उनके लिए बैंक और पोस्ट ऑफिस में एफडी खोलना हमेशा ही सहज तरीका रहा है। हम बचत करने वाले देश हैं क्योंकि भारतीयों की एक पीढ़ी के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट पर बैंकों से दोहरे अंकों का रिटर्न सुरक्षित निवेश के लिए बुद्धिमानी भरा फैसला रहा है। फिक्स्ड डिपॉजिट का एक ऐसा आकर्षण रहा है कि अनेक लोग इसके अलावा और किसी भी निवेश के बारे में सोचते ही नहीं हैं। जमाकर्ताओं के लिए एफडी के आकर्षण की वजहें गारंडटीड रिटर्न, जमा पैसे का सुरक्षित होना, और पांच साल के एफडी पर कुछ टैक्स बचत हैं। एफडी के साथ सबसे आसान चीज यह है कि आप पैसे जमा करते हैं और उसपर मिलने वाले ब्याज से यह धनराशि मैच्योर होने तक बढ़ती जाती है।

और सहजता के साथ जानने के लिए लोग रूल ऑफ 72 का जिक्र करते हैं। यह एक गणितीय शॉर्टकट है, जिससे जाना जा सकता है कि कितने सालों में एफडी डबल हो जाएगी। जितने साल में डबल होना है = 72/ब्याज दर वह फॉर्म्यूला है, जो वित्तीय आकलन और चक्रवृद्धि ब्याज को समझने में उपयोगी है। ऐसे में, नौ फीसदी के ब्याज पर एफडी को डबल होने में आठ साल लगेंगे, जबकि छह फीसदी के ब्याज दर पर इसे डबल होने में 12 साल लगेंगे। हाल के वर्षों में एफडी के डबल होने की वृधि में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 

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एफडी में जोखिम
सरसरी तौर पर एफडी में निवेश में कोई जोखिम नजर नहीं आता। लेकिन एफडी से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न का गहराई से आकलन करने पर आपको आश्चर्य होता है कि एफडी से मिले रिटर्न के तौर पर वस्तुत: ज्यादा कुछ नहीं मिलता। एफडी की ब्याज दर और मुद्रास्फीति की मौजूदा दर का अंतर ही वास्तविक रिटर्न होता है। यानी जब मुद्रास्फीति की दर पांच फीसदी और एफडी की दर 6.7 फीसदी हो, तो बचत पर मिला वास्तविक रिटर्न लगभग दो फीसदी ही है। जोखिम उठाने में अनुच्छिक निवेशकों के लिए एफडी का सबसे बड़ा आकर्षण इसके ब्याज की गारंटी है। लेकिन ऐसे लोग इस तथ्य की अनदेखी कर देते हैं कि एक अवधि के बाद मुद्रास्फीति के अलावा टैक्स के कारण भी उनकी बचत राशि सिकुड़ जाती है।

जैसे मान लीजिए की मुद्रास्फीति की मौजूदा दर घटाने के बाद दो साल के आपके फिक्स्ड डिपॉजिट का वास्तविक रिटर्न दो फीसदी है। अगर आप इसमें 10 फीसदी टैक्स जोड़ते हैं (10 फीसदी टैक्स दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए), तो आपका वास्तविक रिटर्न और कम होकर 1.8 फीसदी रह जाएगा। यहां मुद्रास्फीति की दर को औसत रूप में रखा गया है, जबकि बहुत सी वस्तुएं और सेवाएं ऐसी हैं, जिसमें वृद्धि भले ही साफ-साफ दिखाई नहीं देती, लेकिन उनकी दर ऊंची होती है। ईंधन के मूल्य में वृद्धि मुद्रास्फीति या शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा की बढ़ी कीमत की तुलना में अधिक होती है। 

अपनी उम्र को देखते हुए संजय को म्यूचुअल फंड में निवेश करने के बारे में सोचना चाहिए। म्यूचुअल फंड में कई तरह के निवेश योजनाएं हैं। जैसे लिक्विड फंड बैंक के बचत खाते में निवेश का विकल्प है- इसमें ब्याज मिलने की गारंटी नहीं है, पर इससे टैक्स जिम्मेदारी कम होती है और रिटर्न बैंक के बचत खाते से मिलने वाले रिटर्न के बराबर होता है। अगर कोई टैक्स बचाना चाहता है, तो तीन साल के लॉक-इन वाली इक्विटी लिंकड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) उसके लिए शानदार विकल्प है। सारा पैसा एफडी में रख देना लंबी अवधि में निवेश के लिए ठीक नहीं है, यह आर्थिल लक्ष्य में भी मददगार नहीं होता। निवेश के दूसरे विकल्पों पर विचार ना करना, जिनका रिटर्न भी बेहतर है और जिससे टैक्स भी बचता है, अवसरों को खोना भी है। 
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