लॉकडाउन की वजह से पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) धारकों के लिए सरकार ने राहत भरा फैसला किया है। जिनके खाते परिपक्व हो चुके हैं और वह इसकी अवधि बढ़ाना चाहते हैं, तो 31 जुलाई 2020 तक आवेदन कर सकते हैं। ऐसा नहीं करने पर अतिरिक्त निवेश पर ब्याज नहीं मिलेगा।
डाक विभाग के अनुसार, आम तौर पर पीपीएफ खाते की मैच्योरिटी के साल भर के भीतर अवधि बढ़ाने का आवेदन करना होता है। यानी अगर आपका खाता 31 मार्च 2019 को मैच्योर हो चुका है, तो इसकी अवधि बढ़ाने के लिए 31 मार्च 2020 तक आवेदन करना जरूरी है। इस बार कोविड-19 महामारी वह लॉकडाउन की वजह से आज सुधार को की सहूलियत के लिए तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है।
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पीपीएफ खाते की परिपक्वता अवधि 15 साल होती है। जिसे 15 साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है। अंशधारक किस का आवेदन अपने पंजीकृत मेल आईडी के जरिए कर सकते हैं।
आवेदन से चूके तो नए निवेश पर ब्याज नहीं
आन सुधारक ने अगर खाते की अवधि बढ़ाने का आवेदन नहीं किया तो परिपक्वता अवधि के बाद खाते में किए गए निवेश पर ब्याज नहीं दिया जाएगा। अंशधारक चाहे तो खाते की अवधि नए निवेश के साथ बढ़ा सकता है अथवा बिना निवेश के भी अगले 15 साल तक ब्याज ले सकता है। नए निवेश पर ब्याज के लिए फॉर्म जमा करना जरूरी होगा। लेकिन अगर यह फॉर्म नहीं जमा किया जाता है तो भी खाते में पड़े पुराने निवेश पर ब्याज पहले की तरह मिलता रहेगा। जब तक खाता बंद नहीं करा दिया जाता है।
टैक्स छूट के लिए भी आवेदन जरूरी
पीपीएफ खाता धारक को परिपक्वता अवधि के बाद किए गए निवेश पर अगर आयकर की धारा 80सी के तहत कर छूट का लाभ लेना है, तो भी आवेदन फॉर्म जमा करना जरूरी होगा। ऐसा नहीं करने पर आयकर विभाग उसके निवेश पर संबंधित आकलन वर्ष के रिटर्न में छूट नहीं देगा ईपीएफ पर मौजूदा ब्याज दर 7.10 फीसदी है। आयकर विभाग ने पिछले वित्त वर्ष में कर छूट के लिए निवेश की अवधि भी 31 जुलाई तक बढ़ा दी है। यानी इस महीने के आखिर तक किए गए निवेश पर भी 2019-20 के लिए आयकर छूट ले सकते हैं।