भारत में सभी आय वर्ग के लोगों के लिए क्रेडिट कार्ड सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला वित्तीय टूल बन गया है। नकदी के अभाव में जरूरत पूरी करने का यह सबसे आसान साधन है, लेकिन इसे सही से इस्तेमाल न किया जाए तो कंपनियां कई तरह के शुल्क लगा देती हैं।
क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक या कंपनियां कार्ड पर सालाना 500 से 5,000 रुपये तक का रखरखाव शुल्क वसूलती हैं। कई कंपनियां कार्ड पर नवीकरण शुल्क भी लेती हैं। यह शुल्क कार्ड के फीचर और प्रकृति पर निर्भर करता है। अधिकतर कंपनियां और बैंक कार्ड जारी करते समय ग्राहक को निश्चित मात्रा में खर्च करने पर शुल्क वापसी का विकल्प देती हैं। ग्राहक इन विकल्पों का इस्तेमाल कर शुल्क भुगतान से बच सकता है या दिया गया शुल्क वापस ले सकता है।
क्रेडिट कार्ड पर ग्राहक को नकद निकासी की सुविधा भी मिलती है, लेकिन यह सबसे खर्चीला कदम है। ग्राहक ने एटीएम पर क्रेडिट कार्ड से पैसा निकाला तो इस राशि पर दो से तीन फीसदी नकदी शुल्क या 500 रुपये का न्यूनतम शुल्क लगेगा। इसके अलावा कुछ कार्ड पर दो से तीन फीसदी का फाइनेंस चार्ज भी लगता है, जो भुगतान करने की तिथि तक देना पड़ता है। इसके अलावा 100 से 5,000 रुपये तक लेट फीस भी लगती है। लिहाजा ग्राहक को क्रेडिट कार्ड से नकद निकासी से बचना चाहिए और अगर पैसे निकाले हैं तो जितना जल्दी संभव हो भुगतान कर दें।
क्रेडिट कार्ड पर अमूमन बिल भुगतान के लिए 50 दिन का समय मिलता है। कई बार पैसों के अभाव में ग्राहक समय पर बिल का भुगतान नहीं कर पाता। देय तिथि के बाद भुगतान करने पर लेट फीस के अलावा तीन से चार फीसदी का मासिक शुल्क भी लगता है, जो सालाना 40 फीसदी ब्याज से ज्यादा बैठता है। इससे बचने के लिए देय तिथि के भीतर बिल का भुगतान अवश्य करें। अगर आपने मिनिमम भुगतान किया है तो अगली कोई खरीदारी तब तक न करें, जब तक कि पूरे बिल का भुगतान न हो जाए।