जल्दबाजी में कोई कदम उठाना विपत्ति को बुलाना है, क्योंकि जल्दबाजी में लिए गए फैसले व्यावहारिक न होकर भावुक ज्यादा होते हैं। साथ ही, निष्क्रियता में वक्त न गंवाएं और न ही मौजूदा स्थिति के अति विश्लेषण में जाएं, क्योंकि यह और ज्यादा नुकसान करेगा। इसके बजाय वे कदम उठाना बेहतर होगा, जिन पर आपका नियंत्रण है और जिनके बारे में आप निश्चित हैं। जैसे, अपनी फैक्टरी में आपने कर्मचारियों की संख्या 15 से घटाकर चार कर दी है।
आपको यह याद रखना होगा कि संकट आते और जाते हैं, तथा अतीत में आपने किसी न किसी रूप में संकट का सामना किया होगा। पहला कदम यही होगा कि सोशल मीडिया पर मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी या विश्लेषण करते हुए ज्यादा समय न बिताएं। अपनी लंबी अवधि के आर्थिक लक्ष्यों को लिखें और मौजूदा योजनाओं से उनका मिलान करें। उदाहरण के लिए, अगर आपने छुट्टी पर जाने या समय से पहले रिटायरमेंट की योजना बनाई है, तो इन्हें फौरन अनिश्चित काल के लिए टाल दें।
अगर आप अपने बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित हैं, तो यह समझें कि वे अकेले नहीं हैं। यह महामारी सबके लिए भीषण और अभूतपूर्व है। आशीष नागपाल भविष्य की अपनी तमाम आर्थिक जरूरतों के बारे में सोच सकते हैं, उनमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन याद रखना चाहिए कि उन सबकी फिलहाल जरूरत नहीं है। इसलिए छोटे कदम उठाएं। सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने और अलग-अलग क्षेत्रों की बेहतरी के लिए जो कदम उठा रही और घोषणाएं कर रही है, उन पर नजर रखें। सही अवसरों की तलाश करें और उनका लाभ उठाएं। अभी आप जो कदम उठा रहे हैं, उनमें से सभी सही नहीं भी हो सकते हैं, लेकिन कुछ कदमों का आपको लाभ मिल सकता है।