फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिंता-मनी 16: अनिश्चितता के बीच मैं आर्थिक फैसले कैसे लूं?

Fri, 28 Aug 2020 11:59 AM IST
‌डिंपल अलवधी नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार, नई दिल्ली
विज्ञापन
निवेश - फोटो : pixabay
विज्ञापन

पंचकुला निवासी 49 साल के आशीष नागपाल के लिए पिछले छह महीने बेहद परेशान करने वाले रहे हैं। इस दौरान गारमेंट एक्सपोर्ट का उनका बिजनेस लगभग बैठ गया है। मार्च की शुरुआत में उनके माल को यूरोप पहुंचने में विलंब हुआ, और हालांकि उन्हें उसके पैसे मिले, लेकिन उसके बाद से कोई नया ऑर्डर नहीं मिला। उनकी फैक्टरी में पहले 15 लोग काम करते थे, जो अब घटकर चार रह गए हैं। उनके घर पर वृद्ध माता-पिता हैं। उनकी बेटी ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर की परीक्षा देने वाली है, जबकि कॉलेज एडमिशन में हो रही देरी 12 वीं पास उनके बेटे को परेशान कर रही है।

विज्ञापन


खुद आशीष नागपाल समझ नहीं पा रहे कि कोरोना की पृष्ठभूमि में वह आर्थिक फैसले कैसे लें। कोरोना संकट के अनिश्चय के बीच आर्थिक फैसलों से संबंधित अज्ञानता के कारण लोगों में तनाव बढ़ रहा है। आर्थिक बंदी का नतीजा वेतन कटौती और छंटनी के रूप में सामने आया। लोगों द्वारा किए गए निवेश का मूल्य घट रहा है। ऐसे में, लोग भविष्य की कल्पना करते हुए डर रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि बचत, खर्च और निवेश जैसे अनेक आर्थिक फैसले प्रभावित हो रहे हैं। अनेक आर्थिक फैसले बिना सोचे-समझे लिए गए, जिससे चिंता और बढ़ गई है।

आशीष नागपाल अगर आर्थिक मोर्चे पर अच्छी चीजों पर ध्यान केंद्रित करें, तो वह अच्छे आर्थिक फैसले ले सकते हैं। पहली बात तो यही कि आपको उन चीजों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए, जिन पर आपका वश नहीं है, जैसे-शेयर बाजार, अर्थव्यवस्था, राजनीति और मुद्रास्फीति। इन मुद्दों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए, क्योंकि ये आपकी चिंता ही बढ़ाएंगे। इसके बजाय आपको अपनी बचत, निवेश, धन प्रवाह और भविष्य के आर्थिक लक्ष्यों के बारे में सोचना चाहिए, जो आपको सकारात्मक बनाएंगे। इसके साथ ही मौजूदा स्थिति पर जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया न जताएं। आर्थिक मोर्चे पर कोई फैसला लेने से पहले विकल्पों पर विचार करें।

विज्ञापन
विज्ञापन

सही कदम

जल्दबाजी में कोई कदम उठाना विपत्ति को बुलाना है, क्योंकि जल्दबाजी में लिए गए फैसले व्यावहारिक न होकर भावुक ज्यादा होते हैं। साथ ही, निष्क्रियता में वक्त न गंवाएं और न ही मौजूदा स्थिति के अति विश्लेषण में जाएं, क्योंकि यह और ज्यादा नुकसान करेगा। इसके बजाय वे कदम उठाना बेहतर होगा, जिन पर आपका नियंत्रण है और जिनके बारे में आप निश्चित हैं। जैसे, अपनी फैक्टरी में आपने कर्मचारियों की संख्या 15 से घटाकर चार कर दी है। 

आपको यह याद रखना होगा कि संकट आते और जाते हैं, तथा अतीत में आपने किसी न किसी रूप में संकट का सामना किया होगा। पहला कदम यही होगा कि सोशल मीडिया पर मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी या विश्लेषण करते हुए ज्यादा समय न बिताएं। अपनी लंबी अवधि के आर्थिक लक्ष्यों को लिखें और मौजूदा योजनाओं से उनका मिलान करें। उदाहरण के लिए, अगर आपने छुट्टी पर जाने या समय से पहले रिटायरमेंट की योजना बनाई है, तो इन्हें फौरन अनिश्चित काल के लिए टाल दें। 

अगर आप अपने बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित हैं, तो यह समझें कि वे अकेले नहीं हैं। यह महामारी सबके लिए भीषण और अभूतपूर्व है। आशीष नागपाल भविष्य की अपनी तमाम आर्थिक जरूरतों के बारे में सोच सकते हैं, उनमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन याद रखना चाहिए कि उन सबकी फिलहाल जरूरत नहीं है। इसलिए छोटे कदम उठाएं। सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने और अलग-अलग क्षेत्रों की बेहतरी के लिए जो कदम उठा रही और घोषणाएं कर रही है, उन पर नजर रखें। सही अवसरों की तलाश करें और उनका लाभ उठाएं। अभी आप जो कदम उठा रहे हैं, उनमें से सभी सही नहीं भी हो सकते हैं, लेकिन कुछ कदमों का आपको लाभ मिल सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें