अब आप पर्सनल लोन का इस्तेमाल सोना खरीदने के लिए नहीं कर सकेंगे। ग्राहकों को लोन देने से पहले बैंक यह शर्त रख रहे हैं कि वे इसका इस्तेमाल सोना खरीदने में नहीं करेंगे।
एक निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि बैंकों ने कर्ज देने से पहले ग्राहकों से इन शर्तों पर रजामंदी लेनी शुरू कर दी है।
रिजर्व बैंक की ओर से बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी को सोने की खरीद पर नियंत्रण के लिए इस तरह की शर्तें रखने के निर्देश दिए गए गए हैं।
आरबीआई और सरकार ने मिलकर सोने के आयात को कम करने के लिए कदम उठाए हैं ताकि चालू खाते का घाटा नियंत्रित हो सके।
मौजूदा निर्देशों के मुताबिक बैंक लोन के जरिये सोने की किसी भी रूप में खरीद नहीं की जा सकती चाहे वह सिक्का हो या गहना, गोल्ड ईटीएफ हो या फिर गोल्ड म्यूचुअल फंड की यूनिटें।
जहां तक बैंकों की ओर से बेचे जाने वाले खास तौर पर ढले सिक्कों को गिरवी रखकर लोन लेने का सवाल है तो इसके लिए खास शर्त रखी गई है।
यह सिक्का 50 ग्राम से ज्यादा का नहीं होना चाहिए। एक ग्राहक 50 ग्राम से ज्यादा वजन वाले सिक्के को गिरवी रख लोन नहीं ले सकता।
पिछले महीने बैंकों की ओर से गोल्ड ज्वैलरी निर्यातकों के लिए मंगाए जाने वाले सोने के कंसाइनमेंट आरबीआई ने रोक दिए थे।
इसके साथ ही सोने के सिक्कों और बड़े पदकों का आयात भी रोक दिया गया था।
इसके बाद नामित बैंकों, एजेंसियों और संबंधित निकायों से कहा गया कि वे सिर्फ ज्वैलरी बिजनेस में लगे कारोबारियों को ही सोना मुहैया कराएं।
सोने-चांदी के डीलरों और गोल्ड डिपोजिट स्कीम चलाने वाले बैंक भी तुरंत भुगतान पर ही सोना मुहैया करा सकते हैं।