ट्राई के मुताबिक, कॉलड्रॉप और म्यूट का वास्तविक आंकड़ा जुटाने में ट्राई को छह महीने से एक साल तक लग सकता है। इस अवधि में मिलने वाले आंकड़ों की समीक्षा के आधार पर नए नियम तय किए जाएंगे।
फिलहाल कंपनियों को प्रत्येक तीन महीने में सिर्फ आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट नियामक को सौंपनी होगी। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सेवा प्रदाता कितनी बेहतर सेवाएं दे रहा है। ट्राई ने इस मुद्दे पर गत फरवरी में परामर्श पत्र जारी किया था।
4जी के लिए फिलहाल मानदंड नहीं
मौजूदा समय में 2जी व 3जी सेवाओं में कॉलड्रॉप के लिए मानदंड हैं, लेकिन 4जी में कॉलड्रॉप का कोई पैमाना नहीं है। कॉलड्रॉप को लेकर ट्राई पिछले साल अक्तूबर में पेनाल्टी भी बढ़ा चुका है। ट्राई ने 2जी और 3जी में कॉलड्रॉप को लेकर जारी नियमों में 5 से 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया है।
जबकि 4जी सेवाओं पर यह नियम लागू नहीं होता है। नियामक के पास देश के 21 सर्कल में चल रही 4जी सेवाओं में कॉलड्रॉप या अन्य समस्याओं के संबंध में कोई आंकड़ा नहीं है, जबकि मौजूदा समय में सभी दूरसंचार कंपनियां 4जी सेवाएं नहीं दे रही हैं।