डिलीवरी में देरी, गलत माल भेजना, वापसी में होने वाली दिक्कत और उत्पाद बदलने में आनाकानी जैसे पहलुओं को अब शामिल किया जाएगा और ई-कॉमर्स कंपनियों को उत्पाद के लिए जिम्मेदार बनाया जाएगा।
फर्जी रेटिंग पर भी लगेगी रोक
इसके अलावा अब इन कंपनियों की वेबसाइट पर उत्पाद की फर्जी रेटिंग दी जाती है, जिससे लोग इस पर विश्वास करके सामान खरीद लेते हैं। लेकिन जब उत्पाद घर पर आता है, तो उसकी वो गुणवत्ता नहीं होती है, जो की वेबसाइट पर दर्शायी गई होती है। इस तरह की रेटिंग पर भी रोक लगेगी, जिससे उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी का शिकार न होना पड़े। वहीं कंपनियों के साथ ही विक्रेता को जुर्माना भी देना पड़ेगा।
मेक इन इंडिया पर जोर
ड्राफ्ट पॉलिसी में पूरी तरह से मेक इन इंडिया पर जोर है। इससे कंपनियां विदेशी सामान नहीं बेच सकेंगी। इनको पूरी तरह से भारत में बने उत्पादों को बेचना होगा। इससे देश में कार्यरत ई-कॉमर्स कंपनियों पर विदेशी सामान मिलना मुश्किल हो जाएगा।