शिकंजा कसने पर ऑर्डर में आई कमी
जांच में पता चला है कि भारतीय चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन दो लाख तक ऑर्डर दे रहे थे, जिन पर टैक्स नहीं चुकाया गया। शिकंजा कसने के बाद यह आंकड़ा घटकर प्रतिदिन 1.20 लाख तक आया है, जो अब भी काफी अधिक है। सरकार इस पर पूरी तरह शिकंजा कसना चाहती है। चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों की तुलना में फ्लिपकार्ट और अमेजन को हर दिन औसतन करीब 10 लाख ऑर्डर मिलते हैं।
खरीदारी की जगह का पता लगाना मुश्किल
लोगों को पता था कि भारतीय और चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों के सामान की कीमतों में अंतर कई मामलों में 40 फीसदी तक था। कई चीनी ई-कॉमर्स कंपनियां वेबसाइट पर सामानों की कीमतें भारतीय रुपये में प्रदर्शित करती हैं और सामान डिलीवरी के वक्त रसीद (इनवॉइस) भी नहीं देती हैं। अधिकतर मामलों में खरीदार कैश ऑन डिलीवरी विकल्प चुनते थे, जिससे जांचकर्ताओं को यह पता लगाना और भी मुश्किल हो गया कि कौन से सामान लाए जा रहे हैं और किस स्थान पर खरीदारी हो रही है।
2018 में पहली बार की गई शिकायत
ऑनलाइन पोर्टल लोकल सर्किल के संस्थापक एवं चेयरमैन सचिन टपारिया का कहना है कि हाल ही में सरकार ने सभी चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों के प्लेटफॉर्म के लिए भारत में पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इससे उन्हें भारतीय कानूनों के तहत लाने में मदद मिल सकती है। सचिन ने ही पहली बार 2018 में चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सरकार से शिकायत की थी।