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एनएसओ : 2020-2021 में कृषि और विनिर्माण क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को उबारा

Tue, 01 Jun 2021 03:47 AM IST
Kuldeep Singh बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : pixabay
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आजादी के बाद सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कृषि क्षेत्र फिर संकटमोचक बनकर उभरा। एनएसओ ने सोमवार को जारी जीडीपी के आंकड़ों में बताया कि 2020-21 में पूरे साल वृद्धि दर्ज करने वाला कृषि एकमात्र क्षेत्र रहा। हालांकि, चौथी तिमाही में विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र के दमदार प्रदर्शन से विकास दर 1.6 फीसदी पहुंच गई और अर्थव्यवस्था में गिरावट भी अनुमान से कम दिखी।

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6.9 फीसदी तेजी दिखी विनिर्माण में चौथी तिमाही के दौरान
एनएसओ के अनुसार, चौथी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.1 फीसदी रही जबकि विनिर्माण ने 6.9 फीसदी और निर्माण ने 14.5 फीसदी वृद्धि दर्ज की। वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जब सभी क्षेत्रों में गिरावट आई और जीडीपी विकास दर शून्य से 24 फीसदी नीचे चली गई, तब भी अकेले कृषि क्षेत्र ने 3.5 फीसदी विकास किया।

3.6 फीसदी रही कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर बीते वित्तवर्ष में
दूसरी तिमाही में 3 फीसदी और तीसरी में 4.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की और पूरे साल में कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन 3.6 फीसदी रहा। इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र में 7.2 फीसदी और निर्माण 8.6 फीसदी गिरावट रही। सेवा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां चौथी तिमाही में 2.3 फीसदी और पूरे साल में 18.6 फीसदी गिरावट दिखी।

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दूसरी लहर का असर कम, जुलाई से दिखेगी तेजी : सीईए

मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने 2020-21 में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को संतोषजनक बताया है। उन्होंने कहा कि चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के आंकड़े सराहनीय हैं। दबाव के बावजूद अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। जीडीपी के मुकाबले आपूर्ति से जुड़े जीवीए के आंकड़े ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। कोविड-19 की दूसरी लहर का भी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और जुलाई से दोबारा तेजी दिखने लगेगी।

अच्छे मानसून से ग्रामीण खपत में इजाफा होगा, जो विकास की अगुवाई करेगा। सरकार और आरबीआई लगातार राहत पैकेज लाएंगे, जिससे हर क्षेत्र पर महामारी का दबाव घटाया जा सके। पिछले एक वित्तवर्ष में डिजिटल लेनदेन में 200 फीसदी इजाफा हुआ, जो अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाता है। मार्च में औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक कोविड पूर्व स्तर तक पहुंच गया, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

भारत की विकास दर दुनिया में सबसे तेज रहेगी : ओईसीडी

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने दूसरी लहर के दबाव में सोमवार को भारत के विकास दर अनुमान में 2.7 फीसदी की कटौती कर दी। बावजूद इसके भारत को जी-20 देशों की सबसे तेज विकास दर वाली अर्थव्यवस्था बताया है। ओईसीडी ने 2021-22 के लिए विकास दर अनुमान को 12.6 फीसदी से घटाकर 9.9 फीसदी कर दिया। संगठन के मुख्य अर्थशास्त्री लॉरेंस बून ने कहाए महामारी की दूसरी लहर से आर्थिक सुधारों पर गहरा असर पड़ा है।

इसके बावजूद चालू वित्त वर्ष में भारत करीब 10 फीसदी और अगले वित्त वर्ष में 8.25 फीसदी की विकास दर बनाए रखने में कामयाब होगा। अप्रैल-जून में दबाव का सामना करने वाली भारतीय अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही से फिर तेज गति पकड़ लेगी। चालू वित्तवर्ष में वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर भी 5.8 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पहले 5.6 फीसदी बताया था। इस दौरान अमेरिका की विकास दर 6.9 फीसदी रह सकती है।
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इस साल 10 फीसदी विकास दर का औसत अनुमान

एजेंसी                दूसरी लहर से पहले      बाद में
इंडिया रेटिंग             10.4 फीसदी          10.1 फीसदी
मूडीज                     13.7 फीसदी           9.3 फीसदी
एसबीआई                11 फीसदी              10.4 फीसदी
इक्त्रस                     10.5 फीसदी           9 फीसदी
नोमुरा                      12.6 फीसदी           10.6 फीसदी
बोफा सिक्योरिटीज     10 फीसदी              10 फीसदी
बार्कलेज                   11 फीसदी              9.2 फीसदी
जेपी मॉर्गन                13 फीसदी              11 फीसदी
क्वांटको रिसर्च            11.5 फीसदी           10 फीसदी
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स  12.8 फीसदी           10.7 फीसदी

18.21 लाख करोड़ पहुंचा राजकोषीय घाटा, जीडीपी का 9,3 फीसदी
कोविड-19 महामारी से प्रभावित बीते वित्त वर्ष में सरकार का राजकोषीय घाटा 18.21 लाख करोड़ रुपये रहा, जो जीडीपी का 9.3 फीसदी है। हालांकि, सरकार ने संशोधित बजट अनुमान में 9.5 फीसदी बताया था। महालेखा नियंत्रक (सीजीए) ने सोमवार को आंकड़े जारी कर बताया कि इस दौरान राजस्व वसूली में 7.42 फीसदी गिरावट आई।

वित्त मंत्री ने फरवरी, 2020 में पेश बजट में बीते वित्तवर्ष में 7.96 लाख करोड़ के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया था, लेकिन मार्च से शुरू हुए कोरोना के कहर से यह आंकड़ा दोगुने से ज्यादा बढ़कर 18,21,461 करोड़ रुपये पहुंच गया। 2019-20 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4,6 फीसदी था। यह घाटा किसी एक वित्त वर्ष में सरकार की आय और व्यय का अंतर होता है।
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