इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) महानिदेशक विली वॉल्श ने भारत को लेकर आशावादी होने की बात कही है। उन्होंने दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नागरिक उड्डयन बाजारों को लेकर एक सवाल पर कहा, भारत एक "बेहद रोमांचक बाजार" है और वह बहुत आशावादी हैं। उन्होंने बताया कि आईएटीए का अनुमान है कि 2023 में शुद्ध लाभ 23.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर, जबकि अगले साल (2024 में) वैश्विक एयरलाइन उद्योग को 25.7 बिलियन डॉलर का रहने की उम्मीद है।
बुधवार को आईएटीए महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा, अगले साल (2024 में) दुनियाभर के एयरलाइन उद्योग 964 बिलियन अमेरिकी डॉलर राजस्व अर्जित करेंगे। यह ऐतिहासिक उच्च स्तर होगा। 300 से अधिक एयरलाइनों के समूह- IATA के मुखिया ने कहा, शुद्ध लाभ और राजस्व बढ़ने का प्रमुख कारण यात्री और कार्गो- दोनों क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वृद्धि की उम्मीद है।
स्विटजरलैंड के जिनेवा में पत्रकारों से बात करते हुए आईएटीए महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा, 2024 में 40.1 मिलियन उड़ानों का संचालन किए जाने की उम्मीद है। यह आंकड़ा 2019 के 38.9 मिलियन और 2023 में अपेक्षित 36.8 मिलियन उड़ानों से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन उद्योग का परिचालन लाभ बढ़कर 49.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इस साल परिचालन लाभ 40.7 बिलियन डॉलर रहने का अनुमान है।
आईएटीए के अनुसार "2024 में लगभग 4.7 बिलियन लोग हवाई यात्रा करेंगे। विमानों यात्रियों की संख्या इतनी अधिक कभी नहीं रही। यह ऐतिहासिक ऊंचाई होगी। कोरोना महामारी से पहले 2019 में 4.5 बिलियन लोगों ने फ्लाइट से यात्रा की थी।
IATA के नीति निदेशक और अर्थशास्त्री एंड्रयू मैटर्स ने कहा, "एयरलाइन उद्योग का शुद्ध लाभ 2024 में 25.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2.7 प्रतिशत शुद्ध लाभ मार्जिन) तक पहुंचने की उम्मीद है। इस स्तर तक पहुंचने पर 2023 की तुलना में लाभ थोड़ा अधिक होगा। आईएटीए अधिकारियों ने जिनेवा में 2023 की समीक्षा और 2024 के लिए आउटलुक जारी करने के दौरान प्रमुख बातें साझा कीं।
इसी रिपोर्ट के अनुसार, अगले साल विमानन उद्योग का कुल ईंधन बिल 281 अरब अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान है। जो परिचालन लागत का 31 प्रतिशत है। एयर टरबाइन फ्यूल (ईंधन) की कीमत औसतन 113.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है। आईएटीए ने कहा, एयरलाइंस परिचालन में 2024 में 99 बिलियन गैलन ईंधन की खपत होने की उम्मीद है, जिससे अगले साल कुल खर्च बढ़कर 914 अरब अमेरिकी डॉलर हो जाएगा।