कोरोना काल में सुहाग नगरी फिरोजाबाद के कांच उत्पादों के निर्यात कारोबार को बड़ा नुकसान हुआ है। मार्च से अब तक कांच एक्सपोर्ट व्यापार को करीब चार सौ करोड़ रुपये का झटका लग चुका है। क्रिसमस डे के लिए विदेशों के मिलने वाले आर्डर भी इस बार काफी कम हैं। करीब तीन सौ करोड़ के आर्डर निरस्त हो चुके हैं। सौ करोड़ रुपये का तैयार माल निर्यातकों के गोदामों में डंप पड़ा है।
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फिरोजाबाद में बनने वाले कांच के हैंडीक्राफ्ट उत्पाद पूरी दुनिया में जाते हैं। कांच हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के निर्यात का सालाना कारोबार लगभग आठ सौ करोड़ से अधिक का है। कांच उत्पाद निर्यातकों को विदेशों से तीन त्योहारों पर खूब आर्डर मिलते हैं। इनमें अप्रैल माह में होने वाला ईस्टर, सितंबर माह में मनाए जाने वाला हॉर्वेस्ट पर्व और तीसरा सबसे बड़ा पर्व का क्रिसमस है।
इस वर्ष कांच निर्यातकों ने ईस्टर पर्व के लिए मिले ऑर्डर तो मार्च से पहले ही भेज दिए थे लेकिन हॉर्वेस्ट और क्रिसमस पर्व के लिए मिले आर्डरों को भेजनी की तैयारी थी। मार्च की शुरुआत से ही पूरी दुनिया में कोरोना को लेकर हल्ला मचने लगा। इसका बड़ा असर कांच आइटमों के निर्यात पर भी पड़ा।
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विदेशों से मिले आर्डर होल्ड पर
विदेशों से मिले आर्डर होल्ड करा दिए गए। द ग्लास एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार जुलाई माह तक करीब तीन सौ करोड़ के आर्डर निरस्त हो गए। कोरोना में अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद होने और पूरी दुनिया का बाजार थमने का असर क्रिसमस-डे के बाजार पर भी पड़ा है। निर्यातकों के अनुसार क्रिसमस-डे के लिए तीस प्रतिशत आर्डर भी नहीं मिले हैं।
इन देशों में सर्वाधिक निर्यात किए जाते हैं कांच हैंडीक्राफ्ट उत्पाद
अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, इंग्लैंड, स्पेन, इटली, स्वीडन, डेनमार्क, कोलंबिया और फ्रांस।
ये हैंडीक्राफ्ट उत्पाद किए जाते हैं निर्यात
फ्लावर पॉट, कैंडल स्टैंड, क्रिस्टल बॉल, क्रिसमस ट्री, बाथरूम में साज सज्जा के आइटम, कैंडल होल्डर, लाइटेन, बॉल आदि।
कांच हैंडीक्राफ्ट आइटमों का सालाना कारोबार - लगभग 800 करोड़
पंजीकृत निर्यातकों की संख्या - 108
सक्रिय
निर्यातकों की संख्या - लगभग 70
ग्लास मेन्यूफैक्चर्स एडं एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश बंसल टोनी ने बताया कि प्रतिवर्ष क्रिसमस के लिए आर्डर अक्तूबर माह तक मिल जाते थे लेकिन इस बार कोरोना के कारण पुराने आर्डर भी होल्ड कर दिए गए हैं। इस बार क्रिसमस-डे पर तीस फीसदी कांच उत्पादों का निर्यात होना भी मुश्किल है। यहां निर्यातकों का करीब सौ करोड़ का तैयार माल डंप पड़ा है।
निर्यातक अनीस जैन ने कहा कि कोरोना के कारण माल बाहर भेजने के लिए कंटेनर बुकिंग भी समय से नहीं मिल रही है। सरकार की मदद भी नहीं है। कांच के उत्पाद महंगे भी हुए हैं। आर्डर जगह-जगह लगने वाले फेयर से मिलते हैं। फेयर में पूरी दुनिया से खरीदार आते हैं तो आर्डर भी अच्छे मिलते हैं। इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ तो कारोबार भी प्रभावित हुआ है।
निर्यातक सरवर हुसैन ने कहा कि कोरोना का एक्सपोर्ट बाजार पर बड़ा असर पड़ा है। निर्यात के बाजार पर चालीस से पचास प्रतिशत असर पड़ा हैं। आर्डर निरस्त होने का सबसे बड़ा असर पड़ा है। क्रिसमस-डे के लिए आर्डर तो मिले हैं लेकिन अधिक नहीं हैं। कोरोना का असर तो पूरी दुनिया पर है।