यूरोप के सबसे महत्वपूर्ण बैंक ड्यूश बैंक का किला ढहने के कगार पर है। अमेरिका में 49 खरब डॉलर के अपने भारी-भरकम परिसंपत्तियों का जाल फैलाने वाले इस बैंक की विफलता अमेरिका के कई विफल बैंकों से भी कई गुना बड़ा हो चुकी है। कहने का मतलब यह है कि हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था भी ड्यूश बैंक की विफलता को रोक नहीं सकती है। सही मायनों में कहा जाए तो हमारी आंखों के सामने ही यह बैंक दम तोड़ने जा रहा है।
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यानी ड्यूश बैंक का अंत निकट है। बीते सात जुलाई में इसमें निवेश करने वाले दुनियाभर के निवेशकों को उस समय गहरा धक्का लगा था, जब इस बैंक ने 2022 तक 18,000 नौकरियों में कटौती करने का ऐलान किया था। यह भी कहा था कि शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न देने के उद्देश्य से अपने वैश्विक कारोबार में भागीदारी को भी कम करेगा।
दरअसल, ड्यूश बैंक को इस तिमाही में अनुमान से भी ज्यादा नुकसान हुआ है। इसे 3.5 अरब डॉलर की चपत लगी है। हालांकि, जर्मनी के सबसे बड़े इस बैंक ने 2.8 अरब पाउंड के नुकसान का अंदेशा जताया था। अमेरिकियों को भले ही ड्यूश बैंक के दिवालिया होने से कोई फर्क नहीं पडे़, मगर अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को गहरा धक्का पहुंचने वाला है। कहा तो यह भी जा रहा है कि इससे भारत, अमेरिका, यूरोप समेत दुनिया के बाजारों में एक और लेहमैन ब्रदर्स जैसे हालात की शुरुआत हो सकती है।
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अमेरिकी इतिहास में लेहमैन ब्रदर्स एक वैश्विक वित्तीय कंपनी थी, जो 2008 में दिवालिया हो गई थी। इस आर्थिक घटना ने विश्व स्तर पर शेयर बाजारों को धड़ाम कर दिया था और इसे 1929 की विश्वव्यापी मंदी के बाद सबसे बड़ा वित्तीय संकट माना गया था। इसके बाद से पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी देखी गई थी। लेहमैन ब्रदर्स जैसे हालत के चलते भारत की अर्थव्यस्था भी हिल गई थी। हालांकि, दूसरे आर्थिक सुधारों ने इसे थामे रखा।
वॉल स्ट्रीट भी सहमा
बैंक की इस खराब हालत ने अमेरिका के वॉल स्ट्रीट को भी हिलाकर रख दिया है। क्योंकि अमेरिका के कई बैंकों की वित्तीय व्यवस्था का आधार भी यही बैंक रहा है। ऐसे में इसके ढहने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है। असल में ड्यूश बैंक वॉल स्ट्रीट के बडे़ बैंकों जैसे जेपी मोर्गन चेज, सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्श, मोर्गन स्टैनले और बैंक ऑफ अमेरिका के साथ-साथ यूरोप के बडे़ बैंकों से बड़ी मजबूती से जुड़ा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने 2016 में ही यह चेतावनी दी थी कि जो भी बैंक आपस में जुडे़ हैं, वे वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के लिए अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।
घोटालों ने तोड़ी कमर
दरअसल, ड्यूश बैंक अपने इस अंजाम पर ऐसे ही नहीं पहुंचा है। अरसे से इसमें होने वाले घोटालों ने खास तौर पर नब्बे के दशक में जो घपले हुए, उसने इस बैंक की नींव हिलाकर रख दी। अमेरिका में किए जाने वाले कई निवेशों में बैंक के पैसे डूब गए। इसके अलावा ड्यूश बैंक की साख में भी काफी गिरावट देखी गई।
58 देशों में फैला है नेटवर्क
1870 में स्थापित ड्यूश बैंक जर्मनी का बहुराष्ट्रीय निवेश बैंक और वित्तीय सेवाएं मुहैया कराने वाला बैंक है। इसका मुख्यालय फ्रैंकफर्ट में है। दुनिया के 58 देशों में इस बैंक का नेटवर्क है। इसकी शाखाएं बडे़ पैमाने पर यूरोप, अमेरिका और एशिया में फैली हुई हैं। अप्रैल, 2018 के आंकड़ों के मुताबिक, यह अपनी कुल परिसंपत्तियों के साथ यह बैंक दुनिया का 15वां सबसे बड़ा बैंक है।
2018 में इस बैंक को एक के बाद एक झटके लगने शुरू हुए, जो अभी तक जारी हैं। 2018 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में फैली ड्यूश बैंक की कई शाखाओं का कुल अनुमानित कारोबार 48.266 खरब पाउंड से सिमटकर 43.459 खरब पाउंड (करीब 49 खरब डॉलर) रह गया। यह उस वक्त हुआ, जब ड्यूश बैंक की प्रतिद्वंद्वी अमेरिकी बैंकिंग कंपनियों जेपी मोर्गन चेज, सिटीग्रुप और गोल्डमैन सैक्श ने पहले के मुकाबले क्रमश: 48 खरब डॉलर, 47 खरब डॉलर और 42 खरब डॉलर का कारोबार किया।
हर दिन करीब एक अरब डॉलर का निवेश वापस
नैस्डेक डॉटकॉम के मुताबिक, दिसंबर 2018 तक बैंक की कुल जमा-पूंजी 1.541 खरब डॉलर थी, जबकि उस पर कुल देनदारी 1.469 खरब डॉलर थी। दूसरे शब्दों में कहें तो इसमें निवेश लगातार गिर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, बैंक से हर दिन एक अरब डॉलर का निवेश वापस लिया जा रहा है।