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इस महिला ने घर बेचकर शुरू किया बिजनेस, आज है अरबपति

Tue, 24 Apr 2018 12:38 PM IST
बीबीसी, हिंदी
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मेकअप खरीदने वाली सारी महिलाएं जानती हैं कि ये कितना मुश्किल काम है। दुकानों पर अलग-अलग ब्रांड के काउंटर लगे होते हैं जिन पर मौजूद लड़कियां अपने-अपने प्रॉडक्ट भिड़ाने में लगी रहती हैं फिर चाहे वो ग्राहक की त्वचा को सूट करे या नहीं। जो होरगन इस जोर-जबरदस्ती से इतना परेशान हो गईं कि उन्होंने सूरत बदलने का फैसला किया।

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फ्रांस की एक बड़ी कॉस्मेटिक कंपनी लोरियाल में बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर काम करने वाली जो ने अपनी नौकरी छोड़ी, घर बेचा और अपना खुद का स्टोर खोल लिया। मेक्का नाम के इस कॉस्मेटिक बुटीक में नार्स और अरबन डीके जैसी अच्छी कंपनियों का मेकअप बेचा जाता था। साथ ही सामान की खूबियों के बारे में साफ तौर पर जानकारी दी जाती थी जिससे ग्राहक सोच-समझकर फैसला कर सके।

1997 में ये बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट था। इसलिए इसकी शोहरत इतनी तेज़ी से बढ़ी कि महज दो दशक में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में मेक्का के 87 स्टोर हैं जिनकी सालाना कमाई 287 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी कई हजार करोड़ रुपये है। सही वक्त पर सही मौके को पहचानने वाली जो होरगन आज ऑस्ट्रेलिया की ब्यूटी इंडस्ट्री के सबसे बड़े नामों में से एक हैं।
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मां को तैयार होते देखती थीं जो
अपना बचपन लंदन में बिताने वाली जो अपनी मां को तैयार होते देखती थीं। मेकअप से उन्हें तभी से प्यार हो गया था। जो बताती हैं, "हम अपनी पुराने तरीके की ड्रेसिंग टेबल पर बैठकर बातचीत करते थे। वो हमारे लिए बड़ा खास समय होता था।" जब होरगन 14 बरस की हुईं तो उनका परिवार लंदन छोड़कर ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में बस गया। अपनी उम्र की सभी लड़कियों की तरह जो को भी मेकअप करना पसंद था लेकिन उन्होंने ये कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मेकअप ही उनका करियर बन जाएगा।

पर्थ से स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जो ने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की और फिर अमरीका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया। इसके बाद उन्होंने लंदन में लोरियाल के साथ नौकरी शुरू की और बाद में मेलबर्न ऑफिस शिफ्ट हो गईं। जो के मुताबिक उन्होंने लोरियाल को मेकअप की वजह से नहीं बल्कि मार्केटिंग सीखने के लिए चुना था।

वे बताती हैं कि "लोरियाल की नौकरी बहुत मुश्किल थी। उसमें शुरुआत से ही नतीजे देने का दबाव था और किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जाता था।" जिस वक्त जो ने लोरियाल छोड़कर मेक्का खोलने का फैसला किया उनकी उम्र महज 29 साल की थी। जो के मुताबिक उनकी उम्र उनके लिए फायदेमंद रही क्योंकि उन्हें पता था कि युवाओं को क्या चाहिए। "मैं खुद भी ग्राहक थी। जब आप ग्राहक को अच्छे से जानते हैं तो काम और आसान हो जाता है।"

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सफर नहीं रहा आसान

mecca cosmetic
मेक्का शुरू करने के कुछ साल बाद ही ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कीमत गिर गई जिसकी वजह से विदेशी कंपनियों के सामान खरीदना और भी महंगा हो गया। इसका सीधा नुकसान जो को हुआ, "वो बहुत मुश्किल दौर था क्योंकि आप खुद दोगुनी कीमत देकर सामान खरीदते हैं लेकिन अपने ग्राहक से नहीं कह सकते कि माफ कीजिए, हमें इस सामान की कीमत बढ़ानी पड़ेगी।"

इसे एक बड़ी सीख बताते हुए जो कहती हैं कि "मुड़कर देखूं तो ये एक तोहफे के समान था। इससे मेरे दिमाग को अविश्वसनीय धार मिली। मुझे पता चला कि अपने बिजनेस को जारी रखने के लिए मुझे कौन से बदलाव करने होंगे।" जो ने तकरीबन डेढ़ दशक तक बाजार पर एकछत्र राज किया, लेकिन 2014 में सेफोरा के ऑस्ट्रेलिया आने के साथ ही उनके सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।

सेफोरा फ्रांस के बहुत बडे़ व्यापारिक समूह LVMH (लुई विताँ, मोवेत एनेसी) का स्टोर है जिस पर कई बड़ी कंपनियों के मेकअप और ब्यूटी प्रॉडक्ट मिलते हैं। ऑस्ट्रेलिया में सेफोरा के 13 स्टोर हैं।

लेकिन जो को इससे डर नहीं लगता है। उनका कहना है कि "हमारा मकसद मुकाबले में ज्यादा देर तक टिके रहने और उन्हें मात देने का है।" 2001 में ही इंटरनेट पर आ चुकी उनकी कंपनी मेक्का को जल्दी शुरुआत करने का फायदा भी मिलता है। मेक्का की वेबसाइट को हर महीने 90 लाख बार देखा जाता है। इसके अलावा वे फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी प्रचार करते हैं।

जो होरगन के मुताबिक कॉम्पिटीशन को मात देने के लिए उनकी सबसे पहली नीति अपनी ग्राहक सेवा को बेहतर करना है। इसके लिए कंपनी अपने टर्नओवर का तीन फीसदी अपने 2500 से ज्यादा कर्मचारियों की ट्रेनिंग में खर्च करती है।

पति के साथ मिलकर संभालती हैं कंपनी
जो के पति पीटर वेटनहॉल भी उनके काम में हाथ बंटाते हैं। वे 2005 में कंपनी के को-चीफ एग्जिक्यूटिव बने। जो और पीटर की मुलाकात हार्वर्ड में पढ़ने के दौरान हुई। उनके दो बच्चे हैं। जो के मुताबिक वे खुद को और अपने पति को को-सीईओ के तौर पर देखती हैं क्योंकि वे दोनों कंपनी में अपने-अपने तरीके से योगदान करते हैं।

वे पूरी साफगोई से बताती हैं कि "मैं बहुत अच्छी बॉस नहीं हूं। मुझे मालूम है कि ऐसे कई काम हैं जो मैं अच्छे से नहीं कर पाती।" तो फिर वे यहां तक कैसे पहुंचीं? जो का कहना है कि "मैं उन क्षेत्रों के जानकारों को भर्ती करती हूं और उन्हें भी उसी तरह आगे बढ़ने का मौका देती हूं जैसे मैंने सीखा।"
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