इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शुमार कॉग्निजेंट के कई बैंक अकाउंट को सीज कर दिया है। विभाग ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि कंपनी ने सरकार को 2500 करोड़ का टैक्स जमा नहीं किया
इसलिए उठाया कदम
इनकम टैक्स नियमों के अनुसार हर उस कंपनी को डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स सरकार को देना होता है, अगर उसने पूंजी में कमी करने से किसी प्रकार का लाभ कमाया है। कॉग्निजेंट को 2016-17 में 2500 करोड़ रुपये का ऐसे टैक्स भरना था, जो उसने अभी तक जमा नहीं किया है।
कंपनी ने खुद खरीदे शेयर
कंपनी ने मई 2016 में अपने शेयर होल्डर से खुद शेयर खरीदे थे। इन शेयर होल्डर्स में एक मॉरिशस की कंपनी और एक अमेरिकन कंपनी थी, जिसकी कॉग्निजेंट में 54 व 46 फीसदी की हिस्सेदारी है। कॉग्निजेंट ने शेयर खरीदते वक्त मॉरिशस की कंपनी से टैक्स नहीं काटा, लेकिन अमेरिकन कंपनी से टैक्स काट लिया था।
6000 कर्मचारियों पर लटकी तलवार
कॉग्निजेंट से करीब 6000 भारतीय कर्मचारियों को निकाले जाने की संभावना है ये बात दुनियाभर में आग की तरह फैल चुकी है। कहा जा रहा है वर्तमान मूल्यांकन प्रक्रिया में लगभग 6000 भारतीय कर्मचारियों को निकाला जा सकता है। इसके अलावा अधिक से अधिक अमेरिकी पेशेवरों को नौकरी दी जाएगी।
चेन्नई के आईटी प्रोफेशनल्स ने इससे निपटने के लिए कानूनी विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं और राज्य श्रम विभाग के साथ सुलह प्रक्रिया की तैयारी में जुट गए हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार अप्रेजल चक्र के दौरान कॉग्निजेंट कर्मचारियों की इच्छा के बिना उन्हें नौकरी से निकाल सकती है।
इसके लिए फोरम फॉर आईटी एमप्लाईज ने सहायक श्रम आयुक्त और राज्य श्रम आयुक्त को निवेदन भेज दिया है। उन्होंने कॉग्निजेंट द्वारा कर्मचारियों के निकाले जाने को अवैध निष्कासन बताया है।