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ऑडिट ट्रेल से कंपनियों के कामकाज पर सरकार की नजर, 1 अप्रैल 2022 से होगा लागू

Fri, 26 Mar 2021 08:35 AM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कंपनी के बुक्स ऑफ अकाउंट्स संबंधी नियमों में किया संशोधन
  • कंपनियों के लिए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में ऑडिट ट्रेल फीचर व्यवस्था जरूरी
  • 85 फीसदी तक कंपनियां देश में नहीं करती ऑडिट ट्रेल का इस्तेमाल
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कॉरपोरेट मंत्रालय ने जारी की नोटिफिकेशन - फोटो : pixabay
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विस्तार
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सरकार ऑडिट ट्रेल के जरिए कंपनियों के सभी तरह के कामकाज पर नजर रखेगी। इससे न सिर्फ कंपनियों को लेनदेन का हिसाब रखना होगा बल्कि इससे टैक्स चोरी रोकने में भी मदद मिलेगी। इसके लिए कंपनी मामलों के मंत्रालय ने हाल ही में कंपनी के बुक्स ऑफ अकाउंट्स (लेखा बुक) संबंधी नियमों में संशोधन कर अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने सभी तरह के लेनदेन की जानकारी उसी अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में रखनी होगी, जिसमें ऑडिट ट्रेल रिकॉर्ड होती हो। यह व्यवस्था 1 अप्रैल, 2022 से लागू होगी। 

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दरअसल, यह व्यवस्था 1 अप्रैल, 2021 से लागू होने वाली थी। लेकिन, छोटी एवं मध्यम आकार की कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं थीं। उन कंपनियों का कहना था कि नए नियम के पालन के लिए उन्हें बहुत कम समय दिया गया है और ऑडिट ट्रेल व्यवस्था को लागू करने में समस्या आएगी। इसे देखते हुए सरकार ने नए नियमों के एक साल के लिए आगे बढ़ा दिया। अधिसूचना में कहा गया है कि कंपनियां किसी भी समय इस ऑडिट ट्रेल को न तो रोक सकती हैं और न ही मिटा सकती हैं। नया नियम सिर्फ कंपनियों पर लागू होगा। इसमें एकल कारोबारी, भागीदारी वाले फर्म और एलएलपी शामिल नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक, भारत में 15 लाख में से 80-85 फीसदी कंपनियां ऑडिट ट्रेल का इस्तेमाल नहीं करती हैं। 

अनियमितता का पता लगाने में मिलेगी मदद
ऑडिट ट्रेल की मदद से कंपनी के ऑडिटर यह पता लगा सकेंगे कि किसी लेनदेन की एंट्री को किस दिन अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में चढ़ाया गया है और किस तारीख को इसमें बदलाव किया गया है। इससे यह भी पता लगाया जा सकेगा कि इन बदलावों के पीछे कंपनी के लेखाकारों की मंशा क्या है। अगर कोई एंट्री कुछ समय से बैक डेट में डाली जा रही है तो ऑडिटर इसकी पड़ताल कर कंपनी के निदेशक से इस बारे में पूछताछ कर सकेंगे। आयकर विभाग, जीएसटी अधिकारी, सेबी, बैंक या एनसीएलटी यह डाटा मांग सकते हैं। इसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम-1872 के तहत एक सबूत माना जाएगा। 
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बढ़ सकता है 10 फीसदी कर संग्रह
जानकारों का कहना है कि नए नियम से टैक्स चोरी और अन्य गड़बड़ियों को रोकने में मदद मिलेगी। अगर ऐसा हुआ तो देश के कुल कर संग्रह में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही इससे कंपनियों की लेखा बुक में और पारदर्शिता आएगी। इसके अलावा, चार्टर्ड अकाउंटेंट बैंकों में लोन लेने के लिए झूठे दस्तावेज, प्रमाणपत्र और फाइनेंशियल स्टेटमेंट सत्यापित करने से बचेंगे। बैंक ब़ड़े लोन देने से पहले ऑडिट ट्रेल की स्वतंत्र ऑडिटर से जांच करा सकते हैं या फिर कंपनी के ऑडिटर/मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी से ऑडिट ट्रेल पर रिपोर्ट मांग सकते हैं। 

क्या है ऑडिट ट्रेल
अकाउंटिंग में जब किसी लेनदेन में बदलाव किया जाता है यानी लेनदेन को बदलना, पुरानी तारीख (बैक डेट) में डालना या दूसरे बदलाव का सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया ऑडिट ट्रेल होती है। कुल मिलाकर सॉफ्टवेयर में सभी बदलाव का रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनी के लेनदेन में अनियमितता को पकड़ना है। 

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क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का खुलासा करना जरूरी होगा

सरकार ने एक ताजा नोटिफिकेशन के माध्यम से कंपनी अधिनियम के शेड्यूल तीन में संशोधन की घोषणा की है। यह संशोधन 1 अप्रैल 2022 से लागू होगा। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के इस संशोधन के मुताबिक, अब क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन करने वाली कंपनियों को क्रिप्टोकरेंसी से हुए लाभ-हानि का खुलासा करना होगा और अपनी बैलेंस शीट में दर्शाना होगा कि उनके पास कितनी क्रिप्टोकरेंसी है।

इसके अलावा क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग या निवेश के लिए किसी व्यक्ति से लिए एडवांस या डिपॉजिट की घोषणा भी करनी होगी। इसे क्रिप्टोकरेंसी पर नियंत्रण की दिशा में सरकार का पहला कदम माना जा रहा है। सरकार के इस कदम का क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन से जुड़ी कंपनियों ने स्वागत किया है। इस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक, इससे क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी और क्रिप्टोकरेंसी में संस्थागत निवेश को बढ़ावा मिलेगा। अनुमान के मुताबिक इस समय भारत में 70 से 80 लाख निवेशकों ने क्रिप्टोकरेंसी में लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है।
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