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रिलायंस-फ्यूचर मामला: फ्यूचर ग्रुप को मिली राहत, SC ने संपत्ति जब्त करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

Thu, 09 Sep 2021 01:43 PM IST
‌डिंपल अलावाधी एएनआई, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने अमेजन और फ्यूचर रिटेल मामले में बाजार नियामक सेबी, एनसीएलटी और सीसीआई से अगले चार सप्ताह में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करने को कहा है।
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रिलायंस इंडस्ट्रीज और फ्यूचर रिटेल लिमिटेड - फोटो : twitter: @CCI_India
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने अमेजन-फ्यूचर-रिलायंस मामले से संबंधित दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे फ्यूचर ग्रुप को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने मार्च में संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) से चार सप्ताह के लिए मामले से संबंधित कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करने को कहा है।

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18 मार्च को, एफआरएल को रिलायंस रिटेल के साथ अपने सौदे को आगे बढ़ाने से रोकने के अलावा, न्यायमूर्ति मिढ़ा ने फ्यूचर ग्रुप और उससे जुड़े अन्य लोगों पर 20 लाख रुपये की लागत लगाई थी और उनकी संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया था।
 

फ्यूचर रिटेल ने की थी जल्द सुनवाई की मांग

तीन सितंबर को ही फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक हालिया आदेश के खिलाफ अपनी नई अपील पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग की थी। 17 अगस्त 2021 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) और रिलायंस रिटेल के मामले में अगर चार हफ्तों में सुप्रीम कोर्ट से कोई स्टे नहीं मिलता है, तो वह 24,713 करोड़ रुपये के सौदे को आगे बढ़ने से रोकने वाले एकल-न्यायाधीश के आदेश को लागू करेगा। तीन सदस्यीय पीठ ने एफआरएल के वकील से कहा कि वे फाइल देखने के बाद तारीख देंगे।

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सिंगापुर के आपात निर्णायक (ईए) द्वारा एफआरएल को सौदे को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अमेजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने कहा था कि शीर्ष अदालत से किसी भी रोक के अभाव में, उनके पास है 18 मार्च के जस्टिस जेआर मिढ़ा द्वारा पारित आदेश को लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। न्यायाधीश ने कहा था कि या तो 18 मार्च के आदेश पर दो से तीन सप्ताह के भीतर स्थगन प्राप्त करें या आदेश का पालन करें। इस अदालत के पास कोई तीसरा विकल्प नहीं है ।

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