लॉकडाउन के कारण ताजनगरी के दो लाख चांदी कारीगरों का बुरा हाल हो गया है। काम चौपट होने के कारण कर्जे और उधार पर जिंदगी आकर ठहर गई है। शहर का चमकता चांदी उद्योग ठप पड़ा है। इसकी सबसे ज्यादा मार चांदी कारीगरों को झेलनी पड़ रही है।
परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी है। थोड़ी सी मजदूरी के लिए घंटों खुद को तपाने वाले ये मजदूर हलकान हैं। जिंदगी चलाने के लिये कुछ जमापूंजी खर्च कर रहे हैं, तो कई ने कर्ज तक ले रखा है।
'इस काम में अपनी जिंदगी दे दी'
चांदी कारीगर नितेश कुशवाह ने बताया कि वो 20 वर्षों से कार्यरत हैं। ऐसे हालात पहली बार देखे हैं। खर्च चलाने के लिए मालिक से रुपये उधार लिए हैं। कारीगर भगवान सिंह ने कहा कि आमदनी है नहीं, जमा पूंजी खर्च हो गई, तो एक से कर्ज ले लिया। परिवार में 5 सदस्य हैं। जिंदा तो रहना ही है।